- आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे लोग, कीचड़ से रास्ता लबालब
- तीन दिन से स्कूल नहीं पहुंच पा रहे विद्यार्थी, ग्रामीणों को भी हो रही परेशानी
- यमुना में पानी बढ़ने से डूब जाता है गांव, कोई पुख्ता इंतजाम नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। बिना भेदभाव समान विकास कार्य करने का सरकार का दावा कारगर साबित नहीं हो पा रहा है। जिले में कई ऐसे गांव हैं, जहां आज तक मुख्य रास्तों का निर्माण नहीं हो पाया है। ऐसा ही एक गांव महाबलीपुर बैंसलात क्षेत्र में यमुना नदी से सटा हुआ बसा हुआ है। गांव बसने के 60 साल बाद भी लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। सरकार को ये गांव केवल मतदान के समय याद आते हैं। चुनावों में बड़े-बड़े वादे करने के बाद पांच साल यहां कोई झांकता भी नहीं है। फिलहाल गांव के रास्ते कीचड़ से लबालब हैं। हालात यह हैं कि डेढ़ किलोमीटर लंबे मुख्य रास्ते से वाहन तो छोड़ो पैदल निकलना भी मुश्किल हो रहा है। इसके कारण पिछले तीन दिन से करीब सौ बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। रास्तों की हालत खराब होने के कारण अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेज पाने में असमर्थ हैं।
पलवल शहर के करीब 20 किलोमीटर दूर बसा गांव महाबलीपुर ग्राम पंचायत मुस्तफाबाद में आता है। इस गांव के लिए आज तक पक्का रास्ता नहीं बनाया गया है। हर साल बारिश के मौसम में इस गांव में यमुना का पानी भर जाता है। प्रशासन की ओर से गांव को बचाने या विकास के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए। यमुना में बाढ़ आने पर गांव को खाली कराकर शिविरों में भेज दिया जाता है। बीते साल आई बाढ़ में कई किसानों के पशु बह गए। सारा पशु चारा व ईंधन भी खराब हो गया। गांव के मकान पानी भरने से फट गए थे। इसके बावजूद प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाए। आज तक कोई भी सरकार यहां न तो रास्तों को निर्माण करा पाई है और न ही अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करा पाई है। बता दें कि गांव महाबलीपुर में करीब 250 मतदाता हैं, जबकि कुल आबादी 500 के करीब है। इस बार सरपंच भी गांव महाबलीपुर से जीता है। इसके बावजूद गांव में अभी तक मुख्य रास्ता नहीं बना है।
सैकड़ों बच्चे नहीं पहुंच पा रहे स्कूल
गांव महाबलीपुर में कोई सरकार व निजी स्कूल नहीं है। बच्चों को पढ़ाई के लिए गांव सुल्तानपुर व मुस्तफाबाद के स्कूलों में आना पड़ता है। कच्चा रास्ता होने की वजह से हल्की बारिश में ही रास्ता खराब हो जाता है। पिछले कई दिनों से हो रही बारिश के कारण मुख्य रास्ता कीचड़ से लबालब हो गया। इसके अलावा गांव में रास्तों में जलभराव की समस्या बनी हुई है। मुख्य रास्ते से बाइक व कार नहीं निकल सकती है। ट्रैक्टर को निकालने पर कई जगह ज्यादा गड्ढे होने के कारण फंस जाता है। जो बच्चे निजी स्कूल में पढ़ते हैं, उनकी बस भी केवल पक्के रास्ते तक ही आती है, जिससे बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं।
गांव के रास्ते की हालत बहुत खराब है। तीन दिन से मैं स्कूल नहीं पहुंच पा रही हूं, जिससे पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। - हिमांशी, छात्रा
गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल जाना शुरू ही किया था कि बारिश होते ही रास्ते में कीचड़ हो गया। रास्ते से वाहन भी नहीं निकल सकते, जिससे स्कूल नहीं जा पा रहा हूं। - सागर, छात्र
मैंने रास्तों के निर्माण को लेकर खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी से लेकर उपायुक्त तक व विधायक से लेकर सांसद तक गुहार लगाई है। इसके अलावा सीएम विंडो व मुख्यमंत्री संवाद कार्यक्रम में भी मामले की शिकायत की गई परंतु रास्तों का निर्माण नहीं कराया जा रहा है। यमुना बाढ़ को रोकने के लिए बंद लगाए गए थे, जो पिछली साल आई बाढ़ में कट गए। इसके निर्माण को लेकर भी शिकायत दी हुई है। - मुकेश, ग्राम सरंपच