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पलवल से गहरा नाता रहा है नेताजी सुभाष चद्र बोस का

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पलवल। ‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ का नारा देकर आजाद हिंद फौज का गठन कर ब्रिटिश सरकार को चुनौती देने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस का पलवल से गहरा नाता है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पहली गिरफ्तारी की यादों को सजोए रखने के लिए गांधी सेवाश्रम के अंदर बनी उस कोठरी को देखकर आज भी देशभक्त नौजवानों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं, जिस कोठरी का शिलान्यास 2 अक्टूबर 1938 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने शिलान्यास किया था। पलवल के गांधी सेवाश्रम में आजादी आंदोलन व राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के दुर्लभ चित्रों की लगी प्रदर्शनी के बीच नेताजी का चित्र देख आज भी युवाओं में देशभक्ति की भावना जागृत करता है। आज का युवा वर्ग नेताजी सुभाष चंद बोस की पलवल से जुड़ी गाथा को सुनकर रोमांचित कर देती है।
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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आजादी के आंदोलन के दौरान पलवल में देश के अंदर 10 अप्रैल 1919 को पहली गिरफ्तारी की याद को चिरस्थायी बनाए रखने के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने पलवल आकर गांधी सेवाश्रम का निर्माण करने की इच्छा पलवल के लोगों से जाहिर की। नेताजी की इच्छा जान पलवल के लोहिया सिंगला परिवार ने गांधी सेवाश्रम के लिए अपनी जमीन तक दान कर दी थी। जिसके बाद 2 अक्तूबर 1938 को पलवल आकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने गांधी सेवाश्रम की नींव रखी। नेताजी द्वारा गांधी सेवाश्रम की नींव रखने के लिए बनाई गई पहली कोठरी आज भी यहां लोगों के दिल में नेताजी की याद को तरोताजा रखे हुए हैं। नेताजी के पलवल आगमन के गवाह उस समय के लोग तो अब नहीं रहे, लेकिन उनके द्वारा अपने बच्चों को सुनाई गई नेताजी की गाथा उनके बच्चों से आज भी युवाओं को सुनने को मिलती हैं।
पूरे देश में नहीं है ऐसे दुर्लभ चित्र
गांधी सेवाश्रम लगी है उस समय के दुर्लभ चित्रों की प्रदर्शनी नेेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा जिस गांधी सेवाश्रम की आधारशिला रखा गई थी, उस सेवाश्रम में आज भी आजादी आंदोलन, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पहली गिरफ्तारी के दुर्लभ चित्रों की प्रदर्शनी लगी हुई है। सेवाश्रम ट्रस्ट के पदाधिकारियों का मानना है कि ऐसे दुर्लभ चित्र पूरे देश में कहीं भी नहीं है। इन चित्रों को बड़े ही तरीके से संजोकर रखा है। उस प्रदर्शनी में ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस का बड़ा चित्र अपनी तरफ हर किसी को आकर्षित करता है।
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मेरे दादाजी लाला छिद्दा मल बताया करते थे कि जब नेताजी का जुलूस बाजारों से गुजरा तो बाजार के लालाओं ने उनके स्वागत में दुकानों से निकाल-निकालकर कपड़ों के थान जमीन पर बिछा दिए थे। स्वाधीनता सेनानी तथा उनके साथ छोटे-छोटे बच्चों का जुलूस तिरंगा थामे महात्मा गांधी, भारत मां व नेताजी जिंदाबाद के नारे लगाते हुए चल रहे थे। औरतें घूंघट की ओट में नेताजी की एक झलक पाने के लिए बेताब थीं। नेताजी के साथ दूसरे घोड़े पर मेरे दादा छिददा मल सवार थे। तब का माहौल ही अलग था।
- शैलेंद्र सिंगला, समाजसेवी
ऊंची गर्दन वाले सफेद घोड़े पर सवार होकर आए थे नेताजी
गांधी सेवाश्रम के शिलान्यास वाले दिन के गवाह स्वतंत्रता सेनानी गोबिंद राम बेधड़क के सुपुत्र व गांधी सेवाश्रम के सदस्य एसपी मित्तल के अनुसार उनके पिता बताया करते थे कि दो अक्तूबर 1938 का दिन पलवल क्षेत्र के लोगों के लिए एक सौभाग्यशाली दिन था। नेताजी ऊंची गर्दन वाले सफेद घोडे़ पर सवार थे। आधारशिला रखने के पश्चात उन्होंने पुराने सरकारी अस्पताल के पास आजादी के दीवानों की सभा को संबोधित करते हुए युवाओं का आजादी के आंदोलन में कूदने का आह्वान किया। यही कारण रहा कि भारत छोड़ो आंदोलन में यहां की युवाओं की भागीदारी रही।
गांधी सेवाश्रम एक ऐतिहासिक स्थान है। इसका शिलान्यास नेता जी सुभाष चंद बोस ने किया था। उनके द्वारा किए गए शिलान्यास का पत्थर आज भी आश्रम में लगा हुआ है तथा उस कोठरी को भी उसी रूप में रखा हुआ है। सरकार व प्रशासन को इस आश्रम की सुध लेनी चाहिए। बुजुर्ग बताते थे कि आधारशिला रखने के पश्चात उन्होंने पुराने सरकारी अस्पताल के पास आजादी के दीवानों की सभा को संबोधित करते हुए युवाओं का आजादी के आंदोलन में कूदने का आह्वान किया। कहते हैं कि यहां नेताजी ने कहा था कि आजादी की लड़ाई सब मिलकर लड़ रहे हैं और उनकी प्रण है कि वे आजादी को महात्मा गांधी जी को सौगात स्वरूप भेंट करेंगे।
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- देवीचरण मंगला, प्रधान गांधी सेवाश्रम ट्रस्ट पलवल
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