पलवल। कोरोना काल के दौरान महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत हुए घोटालों में आखिरकार मुकदमा दर्ज हो गया। कई चरणों में हुई जांच के बाद रविवार देर रात जिला विजिलेंस कमेटी के अध्यक्ष और अतिरिक्त उपायुक्त उत्तम सिंह की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया है। उत्तम सिंह ने 25 अप्रैल को मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए थे। माना जा रहा है कि 28 अप्रैल को पलवल आए उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की फटकार के बाद पहला मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले का दिलचस्प पहलु यह है कि चांदहट थाना पुलिस को दी गई शिकायत में घोटाला करने वालों के नाम नहीं दिए गए हैं। हालांकि, शिकायत में घोटाले बाजों से 9.45 लाख रुपये वसूलने के लिए कहा गया है।
डीएसपी यशपाल खटाना के अनुसार, अतिरिक्त उपायुक्त उत्तम सिंह ने पुलिस को शिकायत दी है कि हरियाणा सरकार के विकास पंचायत विभाग के अपर मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से एक अप्रैल को मेमो संख्या मनरेगा 2022/3782 चंडीगढ़ का पत्र उन्हें मिला। पत्र के आधार पर 20 अप्रैल को जिले में मनरेगा के तहत साल 2020-21 व 2021-22 के दौरान हुए कार्यों की जांच के लिए समिति का गठन किया गया। समिति ने जांच में पाया कि हथीन और बड़ौली खंड में किए गए विकास कार्यों में अनियमितताएं बरती गई हैं। स्टेट विजिलेंस पंचायती राज विभाग के एसई ईश्वर सिंह और एचआरडीईए के प्रशासनिक अधिकारी राजकुमार नरवाल ने जांच की। जांच में पाया गया कि हसनपुर रजवाहे के सफाई कार्य की फर्जी मेजरमेंट बुक (एमबी) भरी गई है। मेजरमेंट बुक पर मोहमद असलम जेई पिनगंवा के फर्जी हस्ताक्षर पाए गए और एमबी पर कोई भी नंबर दर्ज नहीं है। यह काम 15 जुलाई 2021 का है। इस मामले में सरकार को 9 लाख 44 हजार 983 रुपये का नुकसान हुआ है। शिकायत में कहा गया है कि इस धनराशि को संबंधित अधिकारियों से वसूल किया जाए।
थाना प्रभारी इंस्पेक्टर रमेश कुमार ने बताया कि शिकायत में किसी भी अधिकारी और कर्मचारी या ठेकेदार का नाम नहीं है। आरोपियों की पहचान के लिए अतिरिक्त कार्यालय को पत्र जारी कर संबंधित पत्रों और रिकॉर्ड सौंपने की मांगा जाएगा। रिकॉर्ड में जो भी अधिकारी और कर्मचारी जिम्मेदार होगा, उसे गिरफ्तार कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी दो बार हो चुकी है कार्रवाई
जिले में कई माह से मनरेगा घोटाले की जांच चल रही है। योजना के कार्यों में अनियमितताएं पाए जाने पर जिला लोकपाल पंकज शर्मा ने दो सरपंचों सहित 13 अधिकारी और कर्मचारियों पर एक-एक हजार रुपये जुर्माना लगा चुकी हैं। वहीं, 3.61 लाख रुपये रिकवर करने के निर्देश भी जारी कर चुकी है।
कई चरणों में हो चुकी है जांच
जिला परिषद के सीईओ प्रशांत अटकान की जांच में मनरेगा घोटाले का उजागर हुआ। इसके बाद मनरेगा लोकपाल पंकज शर्मा ने जांच कर कार्रवाई शुरू की। एक अप्रैल को भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव ने हरियाणा सरकार के विकास एवं पंचायत विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को पत्र लिखा। पत्र में कहा गया कि मनरेगा घोटाले की जांच की जानी चाहिए। पंचायत विभाग की स्टेट विजिलेंस व जिला विजिलेंस कमेटी के द्वारा इस मामले की जांच की गई। जांच रिपोर्ट लेकर टीम प्रभारी ग्रामीण विकास विभाग के संयुक्त निदेशक अनिल कुमार को बदल दिया गया। उनकी जगह संयुक्त निदेशक निर्मल नागर ने दोबारा पलवल आकर करीब एक सप्ताह घोटाले की जांच की।
खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी से मांगा अधिकारियों का विवरण
जिला विजिलेंस कमेटी के अध्यक्ष और एडीसी उत्तम सिंह ने बताया कि घोटालेबाजों के नाम उजागर करने के लिए बड़ौली खंड के बीडीपीओ को पत्र जारी किया गया है। बीडीपीओ को निर्देश दिए गए हैं कि आठ जुलाई से 21 जुलाई 2021 के बीच तैनात संबंधित अधिकारियों का ब्योरा दिया जाए, ताकि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके।