अटोहां चौक पर किसान धरने को संबोधित करते स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती।
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पलवल। केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर नए कृषि कानूनों के विरोध में चल रहा धरना शुक्रवार को भी जारी रहा। किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए कृषि कानूनों की वापसी की मांग की। इस दौरान किसान नेताओं ने कहा कि कृषि कानूनों के लागू होने पर मंडियां बंद होने के साथ महंगाई बढ़ रही है। सरकार ने बाजरे की खरीद करने से मना कर दिया है, जबकि धान की खरीद की तारीख बढ़ाती जा रही है। इससे स्पष्ट होता है कि किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम रेट पर व्यापारियों को अपनी फसल बेचने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
राष्ट्रवादी विचार मंच के अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों की स्थिति लगभग एक जैसी है। सत्ता में आने के बाद सबका दृष्टिकोण बदल जाता है। लाचार-विवश किसान और मजदूर, राजनेताओं के शोषण का शिकार होते हैं। मनमोहन सिंह की सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार व काले धन के खिलाफ स्वामी रामदेव व अन्ना हजारे ने पूरे देश में आंदोलन चलाया था, लेकिन वर्तमान सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आज वे मौन हैं। अब भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी और तीन कृषि काले कानूनों के खिलाफ जोरदार आंदोलन चलाने का समय आ गया है। मास्टर महेंद्र चौहान ने कहा कि सरकार किसान आंदोलन के प्रति गंभीर नहीं है और विपक्षी विवादों में बुरी तरह से उलझे हैं। महंगाई और जमाखोरी निरंतर बढ़ती ही जा रही है। सरकार महंगाई को रोकने में शत-प्रतिशत विफल रही है। प्रतिदिन डीजल और पेट्रोल के दामों में बढ़ोतरी हो रही है। इसका सीधा प्रभाव किसानों पर ही पड़ रहा है। धरने को किसान नेता रतन सिंह सौरोत, सोहन पाल चौहान, उदय सिंह सरपंच, राजेंद्र बैंसला, सुभाष दलाल, नंदलाल सरपंच, धर्मचंद, रमेश साथी, राजकुमार, शिव सिंह दरोगा, हरि नंबरदार, नासीर अहमद, ताराचंद ने संबोधित किया।
पिता और बेटी को आर्थिक सहायता देने की मांग
तीन दिन पहले गांव औरंगाबाद में नरेश द्वारा पत्नी व तीन बच्चों की हत्या के बाद खुदकुशी करने के मामले में किसान संघर्ष समिति ने उपायुक्त को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में कहा गया कि नरेश ने यह कदम खेत व अन्य कमाई के साधन नहीं बचने पर उठाया है। आर्थिक हालत के कारण एक किसान को ऐसा करना पड़ा। उन्होंने मांग की है कि नरेश के पिता व बेटी की गुजर बसर के लिए आर्थिक सहायता दी जाए।