हथीन। ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों में निर्माण एजेंसियों द्वारा किए गए जीएसटी घोटाले की जांच अधर में लटक गई है। राज्य प्रशासनिक सचिव ने सीएम विंडो पर मिली शिकायत के आधार पर जिला पलवल के उप आबकारी एवं कराधान अधिकारी को जांच के निर्देश दिए थे। जांच के लिए एक्साइज टैक्सेशन अधिकारी (ईटीओ) पंकज सागर को नियुक्त किया गया था। गांव गढ़ी विनोदा के पूर्व सरपंच बलजीत ने जांच में तेजी की मांग की है।
विभाग ने छह, 19 और 25 अगस्त को जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी तथा खंड विकास अधिकारी को पत्र भेजकर पंचायतों से भुगतान और जीएसटी विवरण मांगा। जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी उपमा अरोड़ा ने खंड विकास अधिकारियों को लिखित निर्देश दिए, वहीं जितेंद्र चौहान ने ग्राम पंचायतों से विवरण उपलब्ध कराने को कहा। इसके बावजूद कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया। तीन सितंबर को पुनः पत्र भेजा गया परंतु स्थिति यथावत रही।
पूर्व में आठ अगस्त को टैक्स इंस्पेक्टर ऋषि कपूर ने व्यक्तिगत रूप से रिकॉर्ड उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। इसके बाद भी जानकारी नहीं मिली। जांच अधिकारी ईटीओ पंकज सागर ने जिला विकास अधिकारी को आवश्यक निर्देश देने को कहा है। उपमा अरोड़ा ने भी खंड विकास अधिकारी को निर्देशित किया है।
क्या है मामला
यह मामला वर्ष 2017 में लागू हुई जीएसटी नीति से जुड़ा है। ग्राम पंचायतों ने निर्माण एजेंसियों को भुगतान तो किया लेकिन आवश्यक जीएसटी जमा नहीं हुआ। ग्राम पंचायत गढ़ी विनोदा के पूर्व सरपंच बलजीत द्वारा सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी में सामने आया कि जिस फर्म हरकेश इंटरप्राइजेज को भुगतान किया गया, वह जीएसटी में पंजीकृत नहीं थी और उसका दर्शाया गया नंबर फर्जी था। तत्कालीन जिला उपायुक्त ने 16 मई 2022 को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन तीन वर्षों से जांच अधूरी है।