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पंचायत चुनावों का रास्ता साफ होते ही सक्रिय हुए इच्छुक उम्मीदवार

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पलवल। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा सरकार को पंचायत चुनाव कराने की दी गई अनुमति के बाद पलवल जिले में गांवों में सरपंच, पंच, पंचायत समिति सदस्य तथा जिला परिषद का चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवार सक्रिय हो गए हैं। इच्छुक सभी उम्मीदवारों ने अदालत का पंचायत चुनाव रास्ता साफ होने की सूचना मिलते ही नेताओं के यहां हाजिरी लगानी शुरू कर दी है। जहां पहले पंचायत चुनावों में भाजपा समर्पित चुनाव लड़ने वाले अधिक दिखाई दे रहे थे। वहीं अब कांग्रेस का नया प्रदेशाध्यक्ष उदयभान को चुने जाने के बाद पलवल जिले में कांग्रेस समर्पित चुनाव लड़ने वाले इच्छुक उम्मीदवार भी एकाएक सामने आने लगे हैं। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के समर्पित उम्मीदवार भी गांवों में दिखाई देने लगे हैं। गांवों में पंचायत चुनावों की सुगबुगाहट एकाएक तेज हो गई है। चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवार चुनाव का रास्ता साफ होने की सूचना मिलते ही प्रिटिंग प्रेस वालों के यहां अपने बैनर व पोस्टर छपवाने के लिए पहुंचने शुरू हो गए हैं। जिले में कुल 270 पंचायतों में चुनाव होने हैं।
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96 गांवों में रहेगी नारी की सरदारी
हरियाणा सरकार द्वारा पंचायत चुनावों को नए नियम से कराए जाने के बाद पलवल खंड में 41 गांवों में से 14 में महिला सरपंच होंगी, जिनमें से तीन में दलित महिला होंगी। अनुसूचित जाति पुरुष के लिए पांच गांव आरक्षित रहेंगे, जबकि 22 गांव पंचायतें सामान्य वर्ग के लिए होंगी। इनमें दलित महिला के लिए धतीर, रजोलका व रतीपुर, सामान्य महिला के लिए अल्लीका, चिरावटा, धामाका, डुंगरपुर, गेलपुर, घुघेरा, जैंदापुर, पेलक, रजपुरा, राखोता, टीकरी ब्राह्मण तथा अनुसूचित जाति के लिए दुर्गापुर, कारियाका, लालपुर कदीम, सुजवाड़ी व यादुपुर रहेंगे।
प्रदेश सरकार की खुद की चुनाव कराने की मंशा नहीं है। गलत नियम लागू किए गए हैं। भाजपा सरकार का काम केवल लोगों को गुमराह कर लूट मचाना है। सरकार ग्राम पंचायतों के भंग होने के बाद विकास कार्यों के नाम पर अधिकारियों व सरकार के गुर्गों ने लूटने का काम किया है। - करण सिंह दलाल, पूर्व मंत्री व कांग्रेस नेता
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सरकार शुरू से ही पंचायत चुनाव कराना चाहती है, लेकिन विपक्षियों में हार का डर था, इसी कारण कुछ लोगों को आगे कर उच्च न्यायालय में याचिका दायर करा दी। इसलिए देर हुई है। अब अदालत में उन्हें शिकस्त मिल चुकी है, चुनाव जल्द होंगे। विरोधियों को मुंह की खानी पड़ेगी।
- दीपक मंगला, विधायक
ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 23 फरवरी 2021 में ही संपन्न हो गया था। सरकार को अब तक चुनाव कराने चाहिए थे। चुनाव न होने से गांवों में विकास रुके पड़े हैं तथा अधिकारी मिलीभगत कर विकास के नाम पर सरकारी पैसे का दुरुपयोग कर रहे हैं। चुनाव की घोषणा जल्द होनी चाहिए।
- हुकम सिंह, निवर्तमान सरपंच रामगढ़
हमने 15 अप्रैल 2021 को पंचायती राज अधिनियम 2020 में किए गए संशोधन के खिलाफ याचिका दायर की थी। अब सरकार को अदालत ने नई नीति से चुनाव कराने की मंजूरी दे दी है, याचिका पर फैसला अभी लंबित है। पंचायत चुनाव उसी फैसले पर निर्भर रहेंगे।
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- दीपक करण दलाल, अधिवक्ता
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