पलवल। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश सरकार ने ग्राम पंचायतों को ई-पंचायत बनाने के लिए भरसक प्रयास किए, लेकिन अधिकारियों की अनदेखी और सरपंचों की उदासीनता के चलते सरकार की योजना ठप होकर रह गई। आज भी गांवों में सरकार की योजना के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। ई-पंचायत बनाने के लिए पंचायतों में जो कंप्यूटर लगाए गए वे बंद पड़े हैं और इंटरनेट सेवा काम ही नहीं करती है। इतना ही नहीं जिले में अधिकांश ग्राम पंचायतों में तो आज तक ई-पंचायत शुरू ही नहीं हो पाई। यहां तक कि सरपंचों को भी ई-पंचायत के बारे में जानकारी नहीं है, क्योंकि योजना शुरू होने के बाद फिर से हुए चुनाव के बाद ग्राम पंचायतों में नए सरपंच निर्वाचित हो गए और उन्हें ई-पंचायतों के बारे में जानकारी नहीं है। पंचायत विभाग ने भी इस योजना को सिरे चढ़ाने में कोई रुचि नहीं दिखाई। अब बिना कंप्यूटर व इंटरनेट सेवा के ई-पंचायत लागू नहीं हो पाईं।
प्रदेश सरकार ने गांवों के विकास के लिए आने वाली राशि का दुरुपयोग रोकने व भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए सभी ग्राम पंचायतों को ई-पंचायत बनाने की घोषणा की थी। इसके लिए पंच परमेश्वर योजना, परफार्मेंस गारंटी, स्व कराधान योजना, एकीकृत विकास कार्यक्रम, बीआरजीएफ और आरजीएफ योजनाओं में ई-पंचायत कक्ष का निर्माण किया जाना था। इसमें अति लघु बैंक (अल्ट्रा स्माल बैंक) भी स्थापित किए जाने थे। इसमें ग्रामीणों के लिए जाति एवं आय प्रमाण पत्र, खसरा, नक्शा आदि जन सुविधाओं के साथ-साथ लघु बैंक के माध्यम से मनरेगा मजदूरी, सामाजिक पेंशन, बच्चों को मिलने वाली पेंशन राशि का भुगतान किया जाना था। लेकिन जिले में ईं-पंचायतों के लागू न होने से सरकार की इन योजनाओं के लिए आज भी गांवों के लोगों को प्रशासन यहां चक्कर काटने पड़ते हैं।