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Palwal News: फर्जी आयु प्रमाण पत्र के आधार पर वृद्धावस्था पेंशन देने का भंडाफोड़

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- आयु जांच करने वाले चिकित्सक के हस्ताक्षर व मतदाता पहचान पत्र मिले फर्जी
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- दो समाज कल्याण अधिकारियों सहित 11 के खिलाफ मुकदमा दर्ज
- मुख्यमंत्री उड़न दस्ता की जांच में खुलासा


संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। फर्जी आयु प्रमाण पत्र बनाकर वृद्धावस्था पेंशन जारी करने का मुख्यमंत्री उड़न दस्ता ने भंडाफोड़ किया है। अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर सात लोग फर्जी तरीके से पेंशन प्राप्त कर रहे थे। जांच में आयु जांच के लिए मेडिकल करने वाले चिकित्सक के हस्ताक्षर भी फर्जी पाए गए। इसके अलावा विभाग द्वारा दिए गए मतदाता पहचान पत्र भी फर्जी मिले। कैंप थाना पुलिस ने उड़नदस्ता के सब इंस्पेक्टर की शिकायत पर दो तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारियों व कर्मचारियों सहित 11 के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
डीएसपी दिनेश यादव के अनुसार मुख्यमंत्री उड़नदस्ता के सब इंस्पेक्टर राजेंद्र कुमार ने शिकायत दर्ज कराई है कि उन्हें सूचना मिली थी कि हथीन के लडमाकी गांव में कुछ व्यक्ति जिला समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज के आधार पर वृद्धावस्था सम्मान भत्ता ले रहे हैं। शिकायत के आधार पर दस्ते ने समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों से जांच के लिए गांव लडमाकी निवासी अब्दुल रसीद, सहनाज, हासम, रसीद, सायरा, हमीद व अमीना के वृद्धावस्था सम्मान भत्ता मंजूर कराए जाने संबंधित दस्तावेज मांगे। समाज कल्याण विभाग द्वारा सभी लाभार्थियों के असल आवेदन फार्म की सत्यापित प्रति उपलब्ध न कराकर ऑनलाइन आवेदन फार्म की प्रतियां उपलब्ध करा दीं गई, जिसमें उम्र ठीक दर्शाई गई थी। दस्तावेज में 60 वर्ष अधिक उम्र दर्शाने के लिए जिला नागरिक अस्पताल के मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी आयु प्रमाण पत्र लगाया हुआ था। दस्ते ने जिला सिविल सर्जन से उक्त लोगों के बारे में रिपोर्ट मांगी, तो पूरा मामला फर्जी निकला। जांच में पता चला कि आयु प्रमाण पत्रों को समाज कल्याण अधिकारी डॉ.सरफराज खान ने लिखित में सत्यापित किया है कि ये हस्ताक्षर मेडिकल बोर्ड के हैं ही नहीं। जांच में पता चला कि पेंशन फर्जी आयु प्रमाण पत्रों के आधार पर बनाई गई थी। शिकायत में कहा गया कि आवेदन फॉर्म पर मतदाता पहचान पत्र भी लगे हुए थे। उनकी जांच जिला निर्वाचन अधिकारी नूंह से कराई गई। जांच में पाया गया कि आवेदन फार्म में लगी मतदाता पहचान पत्र की कॉपी व निर्वाचन विभाग द्वारा जारी मतदाता पहचान पत्र अलग-अलग हैं। दोनों पर जन्म तिथि भिन्न पाई गई। जिससे साबित होता है कि उक्त व्यक्तियों द्वारा फर्जी मतदाता पहचान पत्रों का उपयोग किया गया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर अधिकारी, कर्मचारी व वृद्धावस्था पेंशन प्राप्त करने वालों के खिलाफ धोखाधड़ी, साजिश रचने, सबूतों को छिपाने सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। मामले में अन्य लोगों के शामिल होने की भी आशंका हैं।
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बिना पड़ताल करे ही जारी की गई पेंशन
विभागीय नियमानुसार आवेदक का वृद्धावस्था सम्मान भत्ता मंजूर करने से पहले जिला समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा इन मतदाता पहचान पत्रों की ऑनलाइन या संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से भौतिक रूप में पड़ताल करानी पड़ती है, लेकिन उनके द्वारा इस नियम की अनदेखी करते हुए मतदाता पहचान पत्रों की पड़ताल ही नहीं की गई और फर्जी आयु आकलन प्रमाण पत्रों के आधार पर वृद्धावस्था सम्मान भत्ता मंजूर कर दिया गया। तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी सरफराज खान व रविंद्र सिंह, लिपिक प्रवेश कुमार व डेटा इंट्री ऑपरेटर मंजीत ने अब्दुल रहीसद, सहनाज, हासम, रसीद, सायरा, हमीद व अमीना के फर्जी आयु आकलन प्रमाण पत्रों के आधार पर वृद्धावस्था सम्मान भत्ता मंजूर किया गया।
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