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छाता और रंगीला पाल के किसानों का भी समर्थन मिला

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पलवल में धरने पर बैठे किसान - फोटो : Palwal
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पलवल। कृषि कानूनों की वापसी व न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गारंटी कानून की मांग को लेकर अटोहां चौक पर चल रहे किसानों के धरने को बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश के छाता व रंगीला पाल के गांव भिडूकी के किसानों ने समर्थन दिया। इस अवसर पर काफी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं। किसानों ने जहां भजन गाए, वहीं महिलाओं ने तीज के लोकगीत गाकर नृत्य किया।
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इस दौरान किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सरकार को चेतावनी दी कि जब तक कृषि कानून वापस नहीं होंगे, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा और न ही किसान अपने घरों को लौटेंगे। बृहस्पतिवार को धरने की अध्यक्षता सुभाष द्विवेदी छाता ने की। जबकि संचालन दरियाब सिंह बंचारी ने किया। वक्ताओं ने कहा कि किसान अब पीछे हटने वाले नहीं है। किसान हर तरह की लड़ाई सरकार से लड़ने को तैयार हैं। कहा कि अब सरकार से आर-पार की लड़ाई लड़ने का मन बना चुके हैं। सरकार कृषि कानून वापस ले। वक्ताओं ने कहा कि भाजपा सरकार ने किसानों के साथ अन्याय किया है। पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकार दमनकारी कानून पारित कर रही है, जो हर वर्ग के लिए दुखदायी है।
इस अवसर पर अच्छेलाल, सुगरी प्यारे छाता, ग्यासीराम छाता, राम सिंह कुश्वाहा मुरैना तथा रणजीत चौहान ने भजनों के माध्यम से सरकार पर जमकर कटाक्ष किया। उन्होंने भजनो के माध्यम से किसानों की हालात पर चिंता व्यक्त करते हुए कृषि कानूनों को वापिस लेने की मांग की। धरने को पोहप सिंह डागर, महेंद्र सिंह चौहान, रतन सिंह सौरोत, बीर सिंह चौहान, राम किशन धामाका, इंदर सिंह रावत, हुकम सिंह चौहान, रूपराम तेवतिया, रामबावू जाटव, गयाराम सिंह धाकड़, राजेश रावत तथा शिव सिंह छाता ने संबोधित किया।
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