होडल। धान और बाजरा की खरीद न होने से नाराज किसानों ने हसनपुर मंडी का जायजा लेने गए एसडीएम वकील अहमद और उनके साथ नायब तहसीलदार तथा जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक को मार्केट कमेटी कार्यालय में बंधक बना लिया। किसानों ने उन्हें कार्यालय से बाहर नहीं निकलने दिया करीब एक घंटे तक एसडीएम की गाड़ी के सामने जमीन पर बैठे रहे। एसडीएम के किसानों की पूरी फसल खरीदने तथा वारदाना मंगलवार शाम तक उपलब्ध कराने का आश्वासन देने के बाद ही उन्हें जाने दिया गया। किसानों ने धान व बाजरा खरीदने पर 250 रुपये से 300 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से रिश्वत मांगने पर भी प्रदर्शन किया था।
हसनपुर मंडी में पिछले एक सप्ताह से किसान बेहद परेशान चल रहे हैं। कभी सरकारी खरीद एजेंसी किसानों से धान खरीदने के बदले 250 से 300 रुपये प्रति क्विंटल रिश्वत मांगते हैं तो कभी कोई अन्य बहाना बना देते हैं। इससे किसानों की धान व बाजरा की फसल मंडी में पड़ी है। रविवार व सोमवार को हुई बारिश के बाद किसानों की पूरी फसल भीग गई। एजेंसियों ने बारिश व वारदाना न होने का बहाना बनाकर फसल खरीदने से मना कर दिया। इसकी शिकायत जब एसडीएम वकील अहमद को मिली तो वे सोमवार की देर शाम हसनपुर अनाज मंडी में निरीक्षण के लिए पहुंचे। उनके साथ होडल के नायब तहसीलदार गौरव राजोरा व जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रण नरेंद्र कुमार भी थे। जैसे ही एसडीएम मंडी में पहुंचे तो किसानों ने उनकी गाड़ी को घेरे में ले लिया तथा एसडीएम को मंडी से बाहर नहीं जाने दिया। किसान एसडीएम की गाड़ी के आगे बैठ गए तथा जमकर नारेबाजी की।
किसान भूपेंद्र, महेंद्र, लोकन, महेंद्र सिंह, नागेश ने बताया कि सरकारी खरीद एजेंसियां तथा अधिकारियों की मिलीभगत से मंडियों में न धान खरीदा जा रहा है और न ही बाजरा। किसान दोहरी मार झेल रहा है। किसान बरबाद हो गया है। एसडीएम ने मंगलवार शाम तक का आश्वासन दिया है कि उनकी फसल खरीद ली जाएगी। यदि ऐसा नहीं हुआ तो इस बार मंडी को पूरी तरह से बंद करा देंगे और अधिकारियों को पूरी तरह से घेर कर उनके कार्यालयों में कैद कर देंगे। वहीं, एसडीएम वकील अहमद ने बताया कि किसानों ने नाराजगी जताई थी। उन्होंने किसानों की समस्या को देखते हुए राइस मिल मालिकों के साथ बैठक कर निर्देश दे दिए गए हैं कि किसानों का धान व बाजरा तुरंत खरीदा जाए।