पलवल। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर सोमवार को किसानों का भारत बंद सफल रहा। किसानों ने धरनास्थल के समीप अटोहां चौक पर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैठकर चक्का जाम कर दिया। किसान राजमार्ग पर दरियां बिछाकर बैठ गए और धरना शुरू कर दिया। किसानों ने कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) और कुंडली-गाजियाबाद-पलवल (केजीपी) इंटरचेंज पर वाहनों को भी रोक दिया, जिससे लंबी कतार लग र्गइं। हालांकि, आवश्यक वाहनों को नहीं रोका गया। इस दौरान किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। करीब चार घंटे तक राजमार्ग जाम कर चले धरने में किसानों ने चौपाई और गीतों के माध्यम से सरकार पर जमकर कटाक्ष किए।
किसान संघर्ष समिति के नेता रतन सिंह सौरौत, महेंद्र सिंह चौहान, धर्मचंद, उदय सिंह सरपंच, सतीश भुर्जा, ऋषिपाल, नरेंद्र सहरावत और रूपराम तेवतिया के नेतृत्व में सोमवार सुबह 10 बजे किसानों ने बाजार में जाकर व्यापारियों से भारत बंद में सहयोग की अपील की। किसानों ने बस स्टैंड से रैली का शुभारंभ किया और पुराने जीटी रोड होते हुए धरनास्थल पर पहुंचे। केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर सुबह से किसानों की भीड़ जुटने लगी। किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से धरनास्थल पर पहुंचे। करीब 11:30 बजे किसानों ने भारत बंद को लेकर बैठक की। बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित अटोहां मोड़ और केएमपी-केजीपी इंटरचेंज को जाम करने का निर्णय लिया गया। करीब 11:40 बजे किसान राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैठ गए और चक्का जाम कर दिया। किसानों ने राजमार्ग पर ट्रैक्टर और पुलिस के बैरीकेड लगा दिए। किसानों ने हुक्का की गुड़गुड़ाहट के साथ धरना शुरू कर दिया।
किसान नेताओं ने कहा कि देश के अन्नदाता पिछले दस महीने से नए कृषि कानूनों को निरस्त कराने की मांग को लेकर सड़कों पर बैठे हैं। सरकार ने पिछले आठ महीने से किसानों से बातचीत बंद कर रखी है, जिससे किसानों में गुस्सा व नाराजगी बढ़ रही है। सरकार की गलत नीतियों के कारण खेती-किसानी ढांचागत संकट के दौर से गुजर रही है। जोतों का आकार छोटा होता जा रहा है। भूमिहीन खेतिहर मजदूर भुखमरी के कगार पर खड़े हो गए हैं। कृषि बीमा के उपाय नाकाम साबित हो रहे हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था कारगर साबित नहीं हो रही है। सरकार कृषि के बढ़ावे के जो उपाय कर रही है, उसका किसानों से कोई जुड़ाव नहीं है। बेतहाशा बढ़ रही महंगाई के कारण किसानों और लोगों का जीना दूभर हो चुका है। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार की जनविरोधी नीतियों के परिणाम स्वरूप ही देश में रोजगार का भारी संकट पैदा हो गया है।रोजगार देने की जगह रोजगार छीने जा रहे हैं। इस चौतरफा संकट का समाधान केवल किसान आंदोलन से ही निकल पाएगा। इसलिए किसान नेताओं ने आह्वान किया कि जब तक कानून वापस नहीं, तब तक घर जाना नहीं। प्रदर्शन की अध्यक्षता जय हिंद शर्मा पहरा ने की, जबकि संचालन मास्टर महेंद्र सिंह चौहान ने किया।
धरने में 52 पालों के अध्यक्ष अरुण जेलदार, प्रेमचंद दलाल, मोहम्मद बिलाल, देवेश कुमार, अजीत बाबी, स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती, बादाम सिंह धतीर, राजेंद्र बैंसला, कुलभानु कुमार, वरुण तेवतिया, दीपक शर्मा, ज्ञान सिंह, करतार मढ़नाका, बाबूराम सरपंच, बिजेंद्र लालवा, धर्मेंद्र हिंदुस्तानी, हेतराम पहलवान, बीर सिंह, निशार कोट, रचना सांगवान, दिगंबर छाता, हर प्रसाद, जयसी कारना, राजेन्द्र घरौट, करतार, आनंद नंबरदार ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
-----
बाजारों में दिखा मिला-जुला असर
भारत बंद का बाजारों में मिला-जुला असर दिखाई दिया। शहर की ज्यादातर दुकानें खुली रहीं। किसानों ने रैली निकालकर दुकानों को बंद करने की अपील की, जिसके बाद गिने-चुने दुकानदारों ने कुछ समय के लिए दुकानें बंद कर दी। किसानों के जाते ही दुकानदारों ने दुकानें खोल दी। किसानों की रैली पूरी तरह से शांतिपूर्ण रही।
आवश्यक वाहनों को जाने दिया
भारत बंद के दौरान युवा किसानों ने एंबुलेंस और सेना, पुलिस की गाड़ियों को जाम से निकलवाया। इसके अलावा निजी वाहनों में यदि किसी को कोई इमरजेंसी थी तो उसे भी जाने दिया गया। जाम में फंसे वाहन चालकों को किसानों द्वारा पानी पिलाया गया।
दंगारोधी सामान के साथ तैनात रहा पुलिस बल
भारत बंद को लेकर पुलिस पूरी तरह से सतर्क रही। आठ स्थानों पर नाकेबंदी की गई, लेकिन इसके बावजूद भी किसान भारी संख्या में धरनास्थल पर पहुंचे। अटोहां चौक पर पुलिस दंगारोधी साजो सामान के साथ तैनात रही। किसानों के शांतिपूर्ण तरीके से रोड जाम करने के कारण पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
अटोहां चौक पर राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर बैठे किसान।- फोटो : Palwal