पलवल। स्थानीय जाट धर्मशाला में 226वां जाट रेजीमेंट स्थापना दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में 52 पाल के पंच अरुण जेलदार मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम का संयोजन बिजेंद्र फौजी मीतरोल व करतार मढनाका ने किया। संचालन पूर्व सैनिक कल्याण समिति के अध्यक्ष कैप्टन बीएस पोसवाल ने किया।
कार्यक्रम में मेघालय के गवर्नर चौधरी सत्यपाल सिंह मलिक ने करतार सिंह मढनाका को फोन पर बधाई दी। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि जाट रेजीमेंट की स्थापना 20 नवंबर 1795 में कोलकाता में हुई थी। ब्रिटिश सेना में जाट रेजीमेंट पर तरह-तरह की आलोचना भी की जाती रही है, परंतु भारत को क्षेत्रफल में दुनिया का सबसे बड़ा देश बनाने में ब्रिटिश सेना में जाट रेजीमेंट का मुख्य योगदान था जबकि घटिया राजनीति ने पूरा एग्रीकल्चर लैंड टू नेशन थ्योरी में बर्बाद कर दिया। वर्तमान भारत की विकरालता नार्थ ईस्ट रीजन में चीन तक ब्रिटिशर्स को पहुंचाने वाले, आज के भारत को बनाने में, साउथ एशिया के बड़े भू भाग को ब्रिटिश भारत बनाने में, दुनिया का सातवां हिस्सा बनाने में जाट रेजिमेंट का अतुलनीय योगदान है। अनेक वीरों ने कुर्बानी दी है। वीरता के अनेक चक्र पुरस्कार स्वरूप मिले हैं। जाट रेजिमेंट के पास सेंट्रल एशिया में जाट सैनिकों की वीरता, फ्रांस में वर्ल्ड वॉर का हौसला, इस्राइल जैसे देशों में जाट गांव बसाना, दुनिया के कई देशों में बड़े जमींदार के रूप में स्थापित होने में जाट रेजीमेंट का योगदान है। इनकम सोर्स के साथ जाट रेजीमेंट वीरता, शौर्यता, अखंडता व गौरव का प्रतीक है।
इस मौके पर कैप्टन श्यामलाल, सूबेदार रनवीर, प्रधान राम प्रसाद बहीन, रनवीर चौहान, रविंद्र रहराना, दलवीर गोपी खेडा, भूपराम सौरोत बंचारी, हरे कृष्ण चौहान, रामकिशन फौजी, सतवीर सिंह, सूबेदार गिर्राज घोडी, जीतराम, राजपाल ने भी अपने विचार रखे।