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पलवल सहित 47 अनाज मंडियों में धान खरीद बंद करने पर किसानों ने दिया धरना

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पलवल। कृषि कानूनों के विरोध में पिछले एक साल से धरने पर बैठे संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में किसानों ने शुक्रवार को अनाज मंडी मेें मार्केट कमेटी कार्यालय पर जाकर धरना दिया। किसानों ने यह धरना सरकार द्वारा हरियाणा में पलवल सहित 47 अनाज मंडियों की बंद की गई धान की खरीद के विरोध में दिया। किसानों ने इस अवसर पर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की तथा सरकार को चेेतावनी दी कि यदि किसानों का धान नहीं खरीदा गया और खरीद को शुरू नहीं कराया गया तो किसान और भी बड़ा आंदोलन कर सकते हैं। किसानों की धान की फसल खराब नहीं होने दी जाएगी।
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किसान नेता महेंद्र चौहान व रतन सिंह सौरोत ने बताया कि तीन नवंबर से पलवल अनाज मंडी में धान की खरीद बंद पड़ी है। जबकि किसानों का धान मंडी में गेट पास काटने के बाद खरीदने को मंगवा लिया गया, लेकिन सरकार के आदेश के चलते अब उसे खरीदा नहीं जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे सरकार की मंशा साफ नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों का शोषण हर तरह से कर रही है। जिसे किसी भी सूरत में बरदाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान पहले ही कम मूल्य मिलने पर बरबाद हुआ पड़ा है। एक तरफ सरकार पहले ही समर्थन मूल्य पर धान नहीं खरीद रही है अब ऊपर से धान खरीद ही बंद कर दी है। उन्होंने कहा कि सरकार धान की खरीद शुरू कराए, नहीं तो अब मंडियों में ताले लगा दिए जाएंगे।
इससे पहले किसानों ने केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर जारी रहा। राजेन्द्र घरौट द्वारा संचालित धरने की अध्यक्षता नंदराम सरपंच पहरा ने की। किसान धरने में नारनौद प्रकरण की निंदा करते हुए भाजपा सांसद के निजी सुरक्षा कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई। धरने में सर्वसम्मति से फैसला किया गया कि 26 नवंबर को आंदोलन के एक साल होने पर किसान धरने में बड़ी हाजिरी के साथ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। धरने में जिला प्रशासन से राष्ट्रीय-राजमार्ग अटोहां चौक पर लगाए गए बैरिकेटिंग को हटाने तथा लालबत्ती लगाने की मांग की गई तथा यह फैसला भी किया गया।
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राष्ट्रीय एकता विचार मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती संयुक्त किसान मोर्चा ने 26 नवंबर को एक ऐतिहासिक दिन के रूप में मनाने का फैसला किया गया है। किसान नेताओं ने जिले के सभी किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं व छात्रों से इस संयुक्त कार्यवाही में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि लखीमपुर खीरी नरसंहार मामले में फोरेंसिक जांच से संयुक्त किसान मोर्चा के रुख की पुष्टि हो गई है जिसमें मोर्चा ने मंत्री पुत्र व अन्य भाजपा कार्यकर्ताओं ने किसानों पर फायरिंग करके गोली चलाई थी। सुप्रीमकोर्ट भी सरकार की जांच से असंतुष्टि व्यक्त करके सख्त टिप्पणी कर चुकी है। किसान नेताओं ने पुन: अजय मिश्रा टेनी की गिरफ्तारी व मंत्रिपरिषद से उसकी बर्खास्तगी की मांग की। धरने में किसान नेता उदय सिंह सरपंच, सोहनपाल चौहान, धर्मचंद घुगेरा, बिधू सिंह, राजेन्द्र बैंसला, रमेशचन्द, किशन चंद, रूपचंद दलाल, श्रीचंद महाशय, धनीराम, चेतराम मैंबर, शिवसिंह दरोगा, अच्छेलाल, गोपी हवलदार व रोशनलाल ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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