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मंडकौला बहुतकनीकी कॉलेज में मिट्टी डलवाने के नाम पर निकले 28 लाख रुपए

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पलवल। नरेगा घोटाले में सरकारी खजाने से राशि निकालते समय नियमों का भी ख्याल नहीं रखा गया। नाबालिग बच्चों के नाम जॉबकार्ड बनाए गए और 30 किलोमीटर दूर गांवों के मजदूरों से काम करवाया गया। दो नाबालिगों से मिट्टी डलवाकर उनके नाम पर 50 हजार रुपये से अधिक की राशि भी जमा कर दी गई। मिट्टी डालने के लिए 100 दिन की जगह आठ महीने तक काम करवाया गया। मंडकौला गांव स्थित बहुतकनीकी संस्थान में मिट्टी डालने के नाम पर 28 लाख रुपये निकाल लिए गए। मंडकौला में पिछले दो साल में करीब 92 लाख रुपये की मिट्टी डाली गई। कोरोना काल में करीब 76 लाख रुपये की मिट्टी डाली गई।
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मंडकौला के पॉलिटेक्निकल कॉलेज में 584 लोगों के नाम मिट्टी डालने में दर्शाए गए हैं। इनमें 274 मजदूर मंडकौला गांव के और 310 मजदूर अन्य 10 गांवों के है। इन गांवों में अंधरौला, खिल्लूका, घर्रोट, मलाई, फिरोजपुर राजपूत, छायसां, हुडीथल, रूपडाका, उटावड, खेडली ब्राह्मण शामिल हैं। इन गांवों के 310 मजदूरों के नाम अकाउंट में राशि जमा करना दर्शाया गया है। मंडकौला पालिटेक्निकल कॉलेज मलाई गांव से करीब 30 किलोमीटर दूर है। पहले साल कॉलेज में सात लाख और दूसरे साल 21 लाख रुपये की मिट्टी डाली गई। गांव मंडकौला में 14-15 साल के बच्चों के भी जॉबकार्ड बनाकर उनके अकाउंट में राशि जमा करवाई गई है। बाप और दो नाबालिग बेटों के अकाउंट में 50 हजार रुपये से अधिक की राशि जमा करवाई गई।
छह माह पहले मिट्टी डाली, रविवार रात फिर डाल दी
गांव लडमाकी, महलूका और हुचपुरी के कब्रिस्तान में मिट्टी डालने के नाम पर करीब 20 लाख रुपये निकाल लिए गए। करीब 6 महीने पहले मिट्टी डालकर मजदूरों के अकाउंट में राशि जमा करवा दी गई, लेकिन रविवार की रात जेसीबी और ट्रैक्टरों से फिर मिट्टी डाल दी गई। जांच करने गईं नरेगा लोकपाल पंकज शर्मा मिट्टी का असेसमेंट भी नहीं करवा पाईं।
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जिले के 66 गांवों में जांच के दौरान कोई काम नहीं पाया गया है। नरेगा कार्यों की जांच के लिए चंडीगढ़ से आई टीम वापस जा चुकी है। अधिकारियों की निगाह अब टीम की जांच रिपोर्ट और कार्रवाई पर टिकी है।
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- प्रशांत कुमार, सीईओ जिला परिषद
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