पलवल। जिले में प्रदूषण का स्तर निरंतर बढ़ता जा रहा है। इस कारण लोगों को परेशानी भी होने लगी है। कृषि विभाग प्रदूषण बढ़ने के लिए किसानों को जिम्मेदार मान रहा है, जबकि दिवाली और गोवर्धन पर हुई बेतहाशा आतिशबाजी ने प्रदूषण को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। इस कारण रविवार को जिले का अधिकतम वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 368 और न्यूनतम 261 रहा, जोकि स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद खतरनाक है। प्रदूषण बढ़ने पर कृषि विभाग ने 68 स्थानों पर पराली जलाने के मामलों की पहचान कर 49 किसानों पर कार्रवाई की है। विभाग की तरफ से किसानों पर करीब 1.25 लाख का जुर्माना भी लगाया गया है। जबकि खुले में कूड़ा जलाने वाले तथा पटाखे बेचने वालों पर प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित रखने के लिए एनजीटी ने पराली जलाने, पटाखे बेचने व चलाने पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बावजूद दिवाली से पूर्व जमकर पटाखों की बिक्री हुई। पर्व पर लोगों ने देर रात तक पटाखे भी चलाए, जिनसे निकलने वाले धुएं ने प्रदूषण के स्तर पर को एकाएक बढ़ा दिया। इसके अलावा जिले में पराली जलाने के मामलों की पहचान की गई है। सैटेलाइट द्वारा प्रशासन ने 68 स्थानों पर पराली जलाने की पहचान की। पराली और पटाखे जलाने के कारण रविवार को जिले का अधिकतम वायु गुणवत्ता सूचकांक 368 रहा, जोकि स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद खतरनाक है। प्रदूषण का स्तर बढ़ने से लोगों के आंखों में जलन व सांस जैसी बीमारियों का भी सामना करना पड़ रहा है।
पराली जलाने के 68 मामले मिले
कृषि विभाग के एसडीओ कुलदीप तेवतिया ने बताया कि जिले में अब तक पराली जलाने के कुल 68 मामले सामने आए हैं। इनमें से 49 मामलों में कार्रवाई अमल में लाई गई। 49 में से 47 मामलों में 1.25 लाख की वसूली की गई है, जबकि दो लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। बाकी मामलों में भी जल्द कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
शहर में सबसे अधिक प्रदूषण
प्रदूषण का सबसे अधिक असर पलवल शहरी क्षेत्र में देखने को मिला रहा है। शहर की आबोहवा पूरी तरह से प्रदूषित है। इसका कारण शहर में चल रहे एलिवेटेड पुल का निर्माण कार्य भी है। पुल के निर्माण के कारण पूरे दिन राजमार्ग व लिंक मार्गों पर धूल उड़ती रहती है। ऐसे में प्रदूषण बढ़ना तय है। लोगों का इस धूल से सांस लेना मुश्किल हो रहा है। एक तो आसमान में दिवाली व गोवर्धन पर हुई आतिशबाजी का जहरीला धुआं तथा दूसरी तरफ धूल के गुबार से बढ़ रहे प्रदूषण के कारण सांस व आंख के मरीजों का तो बुरा हाल है।
आंखों में एलर्जी की बढ़ी समस्या
धूल और प्रदूषण से आंखों में एलजी की समस्या बढ़ रही है। बाहर निकलते ही लोगों की आंखों में खुजली शुरू हो जाती है। आंखें लाल होना तथा हर समय खुजली से लोगों को बेहद परेशानी हो रही है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जयदीप त्यागी का कहना है कि आंखों में ठंडे पानी की छीटे मारें तथा तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। डॉ. द्वारा दी जाने वाली दवाओं का प्रयोग करें। कोशिश करें कि बाहर कम निकलें तथा चश्मा लगाकर ही बाहर निकलें।
घर से निकलते वक्त मास्क का करें प्रयोग
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विजय सिंह ने बताया कि दो दिनों से एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़ गया है। पटाखों के धुएं के कारण इंडेक्स बढ़ा है। यह स्तर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसके अलावा धूल के कारण भी इंडेक्स का स्तर बढ़ जाता है। दो से तीन दिन में इंडेक्स का स्तर सामान्य हो सकता है। घरों से निकलते समय मास्क का प्रयोग करना चाहिए।
आतिशबाजी से बढ़ा प्रदूषण, गर्म पानी का करें सेवन
जिला सिविल सर्जन डॉ. ब्रह्मदीप सिंह का कहना है दिवाली व गोवर्धन पर्व पर हुई आतिशबाजी से आसमान में धुआं फैला है। इससे प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अपना बचाव रखें तथा मास्क पहनकर ही बाहर निकलें। प्रदूषण से सामान्य व्यक्ति को भी सांस की दिक्कत हो सकती है। ऐसे में गर्म पानी का सेवन करें तथा ठंडे पेय पदार्थों से बचें। बाहर वस्तुओं को खाने से भी बचें।