हरियाणा के जिला झज्जर के गांव छारा, महराना, खेड़ी आसरा, मातन, मांडौठी व रेवाड़ी खेड़ा के ग्रामीण और पैक्स के नौ सदस्यों के अलावा किसान सभा के प्रतिनिधि मंगलवार को जिला उपायुक्त से मिले।
उन्होंने उपायुक्त को ज्ञापन देकर आरोप लगाया कि छारा गांव स्थित पीएसीएस और को-आपरेटिव बैंक में तीन करोड़ का गबन हुआ है। दो दिन पहले किसान इस संबंध में गांव में पंचायत भी कर चुके हैं।
ग्रामीणों ने कहा कि छारा गांव स्थित को-ऑपरेटिव बैंक में एफडी और चालू खातों में बैंक अधिकारियों ने मिलीभगत कर तीन करोड़ रुपये का गबन किया है। पैक्स छारा के अंर्तगत छह गांव आते हैं।
इनमें केवल 1200 बोरी डीएपी, 750 बोरी यूरिया और 465 बोरी गेहूं का बीज किसानों को दिया गया है, जबकि छह गांवों में 40 से 50 हजार एकड़ भूमि पर गेहूं की फसल उगाई जाती है।
इसके लिए कम से कम खाद और बीज की 50 हजार बोरी किसानों को मिलने चाहिए। इसके अलावा जिन किसानों ने पैक्स से रबी फसल का बीज खरीदा था, उनकी फसल अंकुरित ही नहीं हुई और खेत खाली रह गए।
इन किसानों में अशोक सिंह, सुमेर सिंह, जोगेंद्र शामिल हैं।
जिला उपायुक्त को दी अपनी शिकायत में कहा है कि छारा पैक्स के अंर्तगत आने वाले महराना गांव की फसल का बीमा कराया गया था और साल 2012-13 में लगभग पूरे गांव की फसल नष्ट हो गई थी।
इसकी सीओ से शिकायत के बावजूद भी किसानों को नष्ट हुई फसल का मुआवजा नहीं मिला। उनका कहना है कि कई किसान एमसीएल से वंचित हैं।
उन्हें कई वर्षों से सदस्य होने के बावजूद फसली ऋण की पूंजी तक नहीं मिलती, जबकि पैक्स कर्मचारी मिलीभगत कर फर्जी तौर पर एमसीएल बनाकर पैसे दिला रहे हैं।
दूसरी ओर, उन्होंने शिकायत में कहा है कि छह गांवों से चुने नौ सदस्य जब किसानों की समस्या लेकर बैंक या पैक्स में जाते हैं, तो उनकी बात नहीं सुनी जाती।
उनका आरोप है कि साल 2007 से लाभ में चल रही सोसाइटी में पैक्स कर्मियों के भ्रष्टाचार के चलते वे किसानों का पैसा हजम कर गए।
जिला उपायुक्त को मिलने वालों में छारा गांव की सरपंच प्रमीला, रिवाड़ी खेड़ा गांव की सरपंच सुमित्रा, मातन गांव की सरपंच शकुंतला, मांडौठी गांव के सरपंच चंद्र, खेड़ी आसरा गांव के सरपंच चरणपाल, महराना गांव के सरपंच के अलावा पैक्स सदस्य देवेंद्र, सुभाष, कुलदीप, श्रीभगवान, जोगेंद्र आदि शामिल रहे।