हरियाणा के जिला सिरसा में बरनाला रोड पर शहीद भगत सिंह स्टेडियम में चल रही स्वामी विवेकानंद हरियाणा राज्य स्तरीय ग्रामीण खेल प्रतियोगिता (पायका) के अंतिम दिन कई खिलाड़ियाें को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
आयोजन कमेटी की टीम का कहना था कि प्रतिभागियों की आयु निर्धारित सीमा से ज्यादा है। प्रतिभागी प्रमाण पत्र दिखाते रहे लेकिन टीम ने दांत गिनकर उम्र का निर्धारण किया। इसमें रोहतक के खिलाड़ियों की संख्या सबसे ज्यादा रही।
जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी का कहना है कि खिलाड़ी फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाकर लाते हैं इसलिए ये कदम उठाया गया है।
शहीद भगत सिंह स्टेडियम में मंगलवार को आयोजित कई मुकाबलाें में अधिक आयु का हवाला देकर खिलाड़ियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
साथ ही उनकेे सीने पर लगे नंबर भी हटा दिए गए। खिलाड़ी आयु की सत्यता के लिए प्रमाण पत्र दिखाते रहे लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई।
भिवानी के गांव दनौदा निवासी रविंद्र कुमार आठ सौ मीटर दौड़ में शामिल होना चाहता था लेकिन उन्हें ट्रैक से वापस भेज दिया गया।
जबकि उसके पास स्कूली प्रमाण पत्र था जिसमें उसकी जन्मतिथि 12 सितंबर 1998 दर्ज थी। पानीपत के गांव पटावला निवासी दीपक कुमार को भी प्रतियोगिता में भाग नहीं लेने दिया गया जबकि उसकी जन्मतिथि 26 जुलाई 1998 थी।
इसी तरह रोहतक के गांव मदीना निवासी नवदीप सिंह, अंकित कुमार, सचिन कुमार, सुमित कुमार के दांत गिनकर उन्हें प्रतियोगिता से बाहर कर दिया गया। हिसार के दिनेश कुमार और सोनू कुमार को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
ससुराल के खिलाड़ियों पर नजरें इनायत
खिलाड़ियों ने बताया कि भिवानी के खिलाड़ियों के न तो प्रमाण-पत्र देखे गए और न ही दांत गिने गए। जब इसका विरोध किया गया तो आयु जांच कमेटी के एक सदस्य ने कहा कि भिवानी में उसकी ससुराल है। वहां के किसी खिलाडी़ को खेलने से नहीं रोका जाएगा।
कोट...
कई खिलाड़ी फर्जी आयु प्रमाण पत्र बनवाकर ले आते हैं। ऐसे में आयु जांचने के लिए दूसरे तरीकों का सहारा लेना पड़ता है। आयु को मामले में खेल विभाग काफी सख्त है। फर्जी प्रमाण पत्र लेकर आने वाले खिलाड़ियाें को पहली बार पकडे़ जाने पर चेतावनी देकर छोड़ दिया जाता है।
-कुलदीप कटारिया, जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी