डबवाली अग्निकांड की 18वीं बरसी पर सोमवार को पीड़ितों का दर्द बेहद गुस्से के साथ सांसद अशोक तंवर और अन्य कांग्र्रेसियों पर फूटा।
सर्वधर्म
प्रार्थना सभा के दौरान पीड़ितों ने कहा कि 18 साल में भी सरकार यहां पर
बर्न यूनिट नहीं बना सकी है। इस वजह से उन्हें इलाज के लिए धक्के खाने को
मजबूर होना पड़ रहा है। पीड़ितों ने कहा कि ‘हमारे जख्म अब भी हरे हैं,
इनमें से खून बह रहा है। अस्पताल में काउंसलर नहीं है और न ही बर्न यूनिट।
सालों से हमें आश्वासन मिलते आ रहे हैं। डॉक्टर साहब 18 साल हो गए हैं,
इतने वर्षों में तो बच्चा भी जवान हो जाता है। फिर हमसे किए गए वायदे क्यों
पूरे नहीं हुए?’ पीड़ितों की इस अपील पर श्रद्धांजलि अर्पित करने आए
स्मारक स्थल पर आए कांग्रेसी लाचार नजर आए।
कांग्रेसियों को जवाब देते नहीं बना
अग्निकांड
पीड़ितों ने सांसद डॉ. अशोक तंवर से कहा कि वे आश्वासन नहीं, बर्न यूनिट
चाहते हैं। उन्हें बताया जाए कि वे कब बर्न यूनिट की आधारशिला रखने आ रहे
हैं। बर्न यूनिट के शिलान्यास की तारीख पूछने पर कांग्रेस नेताओं को कोई
जवाब नहीं आया। सांसद ने ओएसडी (मीडिया) डॉ. केवी सिंह को जवाब देने के लिए
कहा। डॉ. सिंह ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने अग्निकांड पीड़ितों से ही
सवाल कर दिया कि बर्न यूनिट किसे कहते हैं? बर्न यूनिट क्या होती है?
सरकार नियुक्त नहीं कर सकती प्लास्टिक सर्जन : सिंह
डॉ.
केवी सिंह ने कहा कि डबवाली का सरकारी अस्पताल एनएचआरएम में शामिल किया
गया है, जिसके तहत विकास करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बर्न यूनिट के
लिए प्लास्टिक सर्जन की जरूरत होती है लेकिन प्रदेश में स्थित दो सरकारी और
एक अर्द्धसरकारी मेडिकल कॉलेज में ही प्लास्टिक सर्जन नहीं है। उन्होंने
स्पष्ट शब्दों में कहा कि मेदांता, फोर्टिस में सुपर स्पेशलिस्ट का वेतन
साढ़े तीन से चार लाख रुपये है। सरकार उतना वेतन नहीं दे सकती। डॉ. सिंह ने
कहा कि वे अग्निकांड पीड़ितों के साथ हैं। उनकी मांगों को वे मुख्यमंत्री
के समक्ष रखेंगे। उधर, पीड़ित और कांग्रेस नेता टकराव के मूड़ में नजर आए।
ओएसडी के सवाल पर अग्निकांड पीड़ितों की ओर से रमेश सचदेवा ने घोषणा की कि
सरकार बर्न यूनिट बनाए तो सुपर स्पेशलिस्ट का प्रबंध अग्निकांड पीड़ित कर
देंगे।
पीड़ितों के समर्थन में आए कांग्रेसी भी
अग्निकांड
पीड़ितों के साथ व्यापार मंडल डबवाली के अध्यक्ष और कांग्रेस नेता इंद्र
जैन भी उतर आए। उन्होंने सवाल किया कि जो सरकार लोगों को शिक्षा और
स्वास्थ्य नहीं दे सके, वह कभी आगे नहीं बढ़ सकती। अगर 1600 करोड़ रुपये के
बिजली के बिल माफ हो सकते हैं, तो बर्न यूनिट क्यों नहीं बन सकती? मौके पर
मौजूद उपमंडलाधीश सतीश कुमार ने कहा कि अग्निकांड पीड़ितों के लिए डबवाली
के सरकारी अस्पताल में सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए वे प्रयास करेंगे।
उन्होंने अग्निकांड पीड़ितों से वादा कि अग्निकांड की पुनरावृत्ति दोबारा न
हो इसके लिए भी प्रशासन कड़े कदम उठाएगा।
विपक्ष ने भी दिया साथ देने का दावा
जिला
परिषद के चेयरमैन एवं इनेलो नेता डॉ. सीता राम और भाजपा नेता देवकुमार
शर्मा ने कहा कि पीड़ितों को बर्न यूनिट, मेडिकल कॉलेज, रोजगार उपलब्ध
करवाने की आवश्यकता है। इसके लिए प्रयास करने चाहिए। चुने हुए प्रतिनिधि
इसके लिए कदम उठाएं, विपक्ष उनके साथ है।
एम्स के डॉक्टरों से मदद का वादा
सांसद
डॉ. अशोक तंवर ने कहा कि पीड़ितों को इलाज की जरूरत है तो वे एम्स, अपोलो
के चिकित्सकों से मदद लेने को तैयार हैं। सांसद ने कहा कि अग्निकांड स्मारक
पर कुशलता केंद्र स्थापित किया है। इस मौके पर सांसद ने ई लाइब्रेरी का भी
उद्घाटन किया। इससे पूर्व अग्निकांड स्मारक स्थल पर श्री रामायण पाठ और
श्री अखंड पाठ का भोग डाला गया। विद्यार्थियों ने शहीदों को श्रद्धांजलि
अर्पित की। इस अवसर पर कुलदीप गदराना, नवरतन बांसल, विनोद बांसल, शमशेर
सिंह, पवन गर्ग, संदीप सिंह, सन्नी गंगा, सरपंच गुरदित्ता सिंह, बलदेव सिंह
मांगेआना और सतीश जग्गा उपस्थित थे।
अग्निकांड में 442 लोगों की गई थी जान
23
दिसंबर 1995 को चौटाला रोड पर स्थित तत्कालीन राजीव मैरिज पैलेस (अब
अग्निकांड स्मारक स्थल) में डीएवी स्कूल डबवाली का वार्षिक कार्यक्रम चल
रहा था। इसी दौरान एक बजकर 47 मिनट पर शॉर्ट सर्किट से पंडाल के गेट से लगी
आग ने देखते ही देखते कुछ ही मिनटों में 442 लोगों को लील लिया। जिसमें 36
वयस्क, 258 स्कूली बच्चे और 125 महिलाएं और 13 अन्य थे, जबकि 88 लोग घायल
हुए थे। इस कार्यक्रम में करीब दो हजार लोगों ने भाग लिया था। आग से झुलसे
लोगों में से 30 ऐसे लोग हैं, जिनके अंग-भंग हो गए।