भाजपा और हजकां के बीच करनाल लोकसभा सीट पर तलवार खिंच गई हैं।
औपचारिक तौर पर अब तक हजकां ने भाजपा को यह नहीं बताया कि हिसार लोकसभा के अलावा किस दूसरी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे मगर अनौपचारिक तौर पर करनाल पर दावा जताने से हरियाणा भाजपा सकते में है।
भाजपा नेता हजकां को सिरसा या भिवानी लोकसभा सीट देना चाहते हैं।
20 दिसंबर को करनाल में हुई कोर कमेटी की बैठक में हालांकि औपचारिक तौर पर न तो लोकसभा के संभावित उम्मीदवारों और न ही हजकां-भाजपा के बीच सीटों के बंटवारे पर चर्चा होनी थी, मगर अनौपचारिक तौर पर हरियाणा प्रभारी जगदीश मुखी के साथ लोकसभा चुनाव के इच्छुक नेताओं ने अकेले में मुलाकात कर चर्चा की।
हरियाणा भाजपा के तीन वरिष्ठ नेताओं ने अमर उजाला को अनौपचारिक तौर पर बताया कि हजकां अध्यक्ष कुलदीप बिश्नोई ने हाईकमान से समझौते के तहत लोकसभा की दूसरी सीट करनाल मांगी है।
हाईकमान ने औपचारिक फैसला नहीं किया है मगर यह जरूर बताया है कि हरियाणा भाजपा ने इनेलो के साथ मिलकर जो पांच सीटें जीती थीं और भाजपा के सांसद बने थे उनमें से कोई भी सीट हजकां को नहीं दी जाएगी।
भाजपा ने 1999 में गठबंधन में अंबाला, करनाल, सोनीपत, फरीदाबाद और गुड़गांव सीटें जीती थीं।
अंबाला से रतनलाल कटारिया, करनाल से आईडी स्वामी, सोनीपत से किशन सिंह सांगवान, फरीदाबाद से रामचंद्र बैंदा और गुड़गांव से सुधा यादव संसद पहुंचे थे।
वर्ष 2004 के चुनाव में सोनीपत से किशन सिंह सांगवान जीते थे मगर 2009 में इन्हीं पांच सीटों पर इनेलो-भाजपा गठबंधन में भाजपा लड़ी थी।
मगर गठबंधन का एक भी उम्मीदवार संसद नहीं पहुंच पाया था। भाजपा नेताओं ने बताया कि भाजपा की तरफ से हजकां को करनाल की बजाए प्रदेश की दो आरक्षित सीटों में से एक सिरसा या अन्य जनरल सीट भिवानी-महेंद्रगढ़ की आफर की जाएगी।
गौरतलब है कि भाजपा के पास सिरसा और भिवानी में फिलहाल मजबूत उम्मीदवार नहीं है।
हम करनाल सीट किसी भी सूरत में नहीं देंगे क्योंकि करनाल सीट पारंपरिक तौर पर भाजपा की सीट रही है।
हरियाणा भाजपा के तीन नेता (एक पूर्व सांसद, एक विधायक, एक जिला अध्यक्ष)