स्वास्थ्य विभाग की ओर से शुरू बाल स्वास्थ्य योजना के तहत बच्चों के स्वास्थ्य की जांच में विभाग को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
योजना के प्रारंभिक चरण में आंगनबाड़ी केंद्राें मेें आने वाले बच्चों की जांच की जा रही है, लेकिन अधिकतर केंद्रों के बंद पाए जाने, खुला मिलने पर काफी कम संख्या में बच्चे मिलने के कारण सभी बच्चों के स्वास्थ्य की जांच नहीं हो पा रही है।
विभाग ने अब महिला एवं बाल कल्याण विभाग की कार्यक्रम अधिकारी को लिखित में अवगत करवाए जाने का निर्णय लिया है। डिप्टी सिविल सर्जन एवं योजना के जिले में को-ऑर्डिनेटर डा. देवेंद्र शर्मा का कहना है कि पंद्रह दिनों तक चले जांच अभियान में यह परेशानी आई है कि कई आंगनबाड़ी केंद्र समय से पहले बंद हो जाते हैं।
कइयों में केवल भोजन के समय ही बच्चे मिलते हैं। वहीं, अधिकतर में बच्चों की संख्या काफी कम होती है। इन सभी समस्याओं को लेकर कार्यक्रम अधिकारी को सूचना दी जाएगी ताकि केंद्रों में बच्चे मिल सकें और उनकी स्वास्थ्य जांच हो सके।
क्या है योजना
जिले भर में चार लाख से अधिक बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की जानी है। इसके लिए सबसे पहले विभाग की ओर से 10 टीमें बनाकर सभी ब्लॉकों में आंगनबाड़ी केंद्रों से शुरुआत की गई है।
प्रत्येक टीम हर दो से तीन आंगनबाड़ी केंद्रों की जांच कर रही है। अभी तक हुई 16 हजार बच्चों की जांच में एक बच्चे को दिल की गंभीर बीमारी पाई गई है। इसके इलाज के लिए विभाग को एस्टीमेट बनाकर भेज दिया गया है।
जांच अभियान में शामिल स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि अधिकतर आंगनबाड़ी केंद्र समय से पहले ही बंद हो जाते हैं, जिस कारण सभी बच्चों के स्वास्थ्य की जांच नहीं हो पा रही है।
केवल भोजन के समय आते हैं बच्चे
इतना ही नहीं, कई आंगनबाड़ी केंद्रों में केवल भोजन के समय ही बच्चे आते हैं, जिस कारण टीम के लिए एक दिन में एक से अधिक केंद्रों की जांच करने में परेशानी आ रही है। इससे यह भी खुलासा हो रहा है कि अधिकतर केंद्रों पर बच्चों को केवल खाने के समय ही बुलाया जा रहा है।
कई केंद्र मिलते हैं बंद
स्वास्थ्य कर्मियों के अनुसार कई केंद्र बंद भी मिल रहे हैं। मंगलवार को कैथल शहर में ही दो आंगनबाड़ी केंद्र बंद पाए गए। वर्कर्स से जब संपर्क किया गया तो उनका जवाब था कि एक दुर्घटना में घायल हो गई है तो दूसरी वर्कर के घर विवाह समारोह होने के कारण वह केंद्र नहीं खोल सकती।
फर्जी नाम भी चढ़ाए गए हैं रजिस्टर में
एक केंद्र में ऐसे बच्चों के नाम दर्ज किए गए हैं, जो गांव में है ही नहीं। ऐसे में केंद्रों में हो रही खानापूर्ति जांच का विषय है। इसके अलावा जितनी संख्या में बच्चों के नाम दर्ज हैं, उसमें अधिकतर आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की संख्या 30 से 40 प्रतिशत तक कम ही मिलती है। यह संख्या भी तब जाकर पूरी होती है, जब पहले से संबंधित आंगनबाड़ी केंद्र को सूचित कर दिया जाता है।
स्वास्थ्य जांच से वंचित रह सकते हैं अनुपस्थित बच्चे
स्वास्थ्य विभाग की मानें तो यदि बच्चे इसी तरह कम मिलते रहे तो काफी संख्या में बच्चे स्वास्थ्य जांच से छूट सकते हैं। जो इस अभियान की सफलता में बड़ी बाधा बन सकती है। अभी तक हुई जांच में जिले भर मेें लगभग 16 हजार बच्चों की जांच हो चुकी है।