प्रधानमंत्री द्वारा तीनों कृषि कानूनों को रद्द किए जाने की घोषणा से किसानों व अन्य संगठनों में खुशी है। किसानों ने इसे संघर्ष की जीत बताया वहीं हर वर्ग ने प्रधानमंत्री के इस निर्णय का स्वागत किया है। गुरु पर्व पर तीनों कृषि कानून वापस लेने के प्रधानमंत्री के फैसले की हर वर्ग ने सराहना की है। वहीं विपक्षी नेताओं ने सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार यह निर्णय पहले भी ले सकती है। उन्होंने इस संघर्ष को किसानों की जीत बताया।
प्रधानमंत्री मोदी किसानों के हितों के लिए कार्य कर रहे
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों के हितों के लिए कार्य कर रहे हैं। कृषि कानून छोटे किसानों की भलाई के लिए थे लेकिन इसको लेकर किसानों की तरफ से गतिरोध बना हुआ था। कृषि कानून को लेकर सबसे अधिक भ्रम कांग्रेस पार्टी व कम्युनिस्ट पार्टी ने पैदा किया। सात साल के शासन काल में आम जनता के साथ-साथ किसान हित के लिए अनेक योजनाएं लागू की है जिनका किसानों को भरपूर लाभ मिल रहा है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा किसानों के साथ हैं। - रामबिलास शर्मा, पूर्व शिक्षा मंत्री, हरियाणा सरकार।
- किसानों के संघर्ष की हुई जीत
प्रधानमंत्री द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा किसानों के संघर्ष की जीत है। देर से आए दुरुस्त आए, किसानों का संघर्ष रंग लाया। किसान एक वर्ष से संघर्षरत थे। आंदोलन के दौरान सैकड़ों किसानों ने अपनी जान की कुर्बानी दी है। आंदोलन में शहीद हुए परिवारों के प्रति उनकी संवेदना है और सरकार से मांग है कि शहीद किसानों के परिवारों को नौकरी दें। किसानों पर दर्ज किए गए मुकदमे खारिज किए जाएं। -राव दानसिंह, कांग्रेस विधायक।
निर्णय का स्वागत, एमएसपी की गारंटी पर बने कानून
देश के अन्नदाता एक वर्ष से लगातार संघर्ष की राह अपनाए हुए था। यह जीत किसान के संघर्ष की जीत है। किसानों ने अंग्रेजी हुकूमत को भी अहिंसा के जोर पर हिलाने का काम किया था और एक बार फिर से इतिहास दोहराया गया है। कानून वापसी की घोषणा पर प्रधानमंत्री का स्वागत है। यही अवसर है अब सरकार शीघ्र ही एमएसपी की गारंटी कानून बनाकर किसानों को तोहफा दे सकती है। यह जीत देश के अन्नदाता की जीत है। किसानों के संघर्ष की जीत है। -करतार सिंह, महासचिव, किसान संघर्ष समिति, बारड़ा।
किसानों के सत्याग्रह ने अहंकार को झुकाया
भाजपा सरकार का देश के अन्नदाताओं ने सत्याग्रह करके अहंकार से सिर झुका दिया है। यह जीत देश के सभी किसानों की जीत है। बीजेपी सरकार ने किसानों पर बहुत अत्याचार किए उसका बदला जनता चुनाव के दौरान जरूर लेगी। किसानों के संघर्ष की जीत हुई है। - डॉ. हिम्मत यादव, प्रवक्ता, हरियाणा प्रदेश कांग्रेस पार्टी।
सरकार ने पहले क्यों नहीं लिया यह निर्णय
किसानों के लिए खुशी की बात है कि किसान विरोधी सरकार ने आगे आने वाले चुनाव के डर से तीनों कृषि कानून बिल वापस लेने का निर्णय लिया है। इस सरकार ने अंग्रेजी हुकूमत की तरह किसानों पर अत्याचार किए। तीनों कृषि कानून बिल गलत थे तो यह निर्णय पहले क्यों नहीं लिया गया। आंदोलन में जो किसान शहीद हुए हैं उनकी मौत का जिम्मेदार कौन है। -सुनील अत्री, युवा प्रदेश अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन जनशक्ति।
किसानों व मजदूरों के संघर्ष की हुई है जीत
जय किसान आंदोलन की तीन किसान विरोधी काले कानूनों के खिलाफ यह ऐतिहासिक जीत है। यह जीत उन लाखों किसानों, खेत के मालिक, खेतिहर मजदूर और खेती से जुड़े किसी भी व्यवसाय में लगे लोगों की जीत है। पिछले एक वर्ष से भारत के हर राज्य में किसान आंदोलन का हिस्सा रहे हैं। 700 से अधिक किसानों ने अपनी इस जीत में अपनी शहादत दी है। सभी बाधाओं के खिलाफ किसानों की जीत लोक संघर्ष की ताकत का परिणाम है जिसके खिलाफ आज भाजपा सरकार को झुकना पड़ा। -संदीप यादव, प्रदेश प्रवक्ता, जय किसान आंदोलन।