नारनौल। शहर की ऐतिहासिक पहचान जलमहल अब फिर से अपने पुराने स्वरूप में लौटने की तैयारी में है। जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग ने जलमहल में नहरी पानी भरने का काम शुरू कर दिया है। लंबे समय बाद महल के चारों ओर पानी नजर आएगा जिससे इसकी सुंदरता और आकर्षण बढ़ेगा।
प्रशासन ने इस बार पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जलस्तर सीमित रखने का फैसला किया है। जलमहल में पानी की गहराई चार से पांच फुट तक ही रखी जाएगी, ताकि किसी तरह की दुर्घटना की संभावना न रहे।
जलमहल परिसर को सुंदर बनाने के लिए भी कई काम किए जा रहे हैं। यहां फूलदार पौधे लगाए जाएंगे। वहीं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने सुरक्षा बढ़ाने के लिए चहारदीवारी को ऊंचा करवाया है, ताकि पशुओं और असामाजिक तत्वों का प्रवेश रोका जा सके।
वर्ष 2015 के बाद जलमहल में नियमित जलभराव नहीं हो पाया था। वर्ष 2018 में भी जलभराव की कोशिश की गई थी, लेकिन पंचकुइयां तालाब की दीवार क्षतिग्रस्त होने से काम रोकना पड़ा था। अब मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद फिर से पानी भरने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
मुगल काल में 1591 ई. में बने इस जलमहल का ऐतिहासिक महत्व है। पानी से घिरने के बाद यह स्मारक एक बार फिर पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनेगा।
सात अगस्त को सीएम भी कर सकते हैं दौरा
ऐतिहासिक स्मारक जलमहल में पानी भरने को लेकर जिला उपायुक्त अनुपमा अंजली ने भी दो दिन पूर्व यहां दौरा किया था। इस दौरान जलमहल का भ्रमण करते हुए उन्होंने बताया कि उनका प्रयास रहेगा कि सात अगस्त को नारनौल में मैराथन कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह को भी जलमहल का दौरा करवाया जाए।
वर्जन:
जिला प्रशासन व सिंचाई विभाग के सहयोग से जलमहल में नहर का पानी भरवाया जा रहा है। पिछले सप्ताह नहर में पानी आने पर जलमहल में कुछ समय पानी चला था लेकिन नहर बंद होने से जलापूर्ति रुक गई थी। अब दोबारा नहर आने के बाद शुक्रवार से पानी आना शुरू हो गया है। यह अब लगातार आता रहा तो जल्द ही जलमहल के चारों तरफ पानी भर जाएगा।
-अमित कुमार, संरक्षण सहायक, भारतीय पुरातत्व विभाग नारनौल