दो दिन हुई बारिश कई जगह फसलों पर तबाही बन कर बरसी है। राजस्थान की तरफ से पानी आने से बॉर्डर के कई गांवों में फसल बर्बाद हो गई। वहीं, अटेली में बांध टूटने कुछ गांवों की फसल को नुकसान पहुंचा है।
नारनौल से 18 किलोमीटर पर गोदलबाहा में राजस्थान का बॉर्डर है। जिसकी दूसरी तरफ पचेरी और सिंघाणा पड़ते हैं। वहां से एकाएक काफी पानी इस तरफ आ गया क्योंकि राजस्थान का इलाका ऊंचाई पर है। इस पानी ने कई गांवों में तबाही मचाई, कुछ जगह तो पानी फसल को बहा कर ले गया। राजस्थान से आए पानी से मोहनपुर, जाखनी, जैलाफ, बदोपुर, जादूपुर, खटोटी, भांखरी, दोचाना, रघुनाथपुरा और गहली गांवों में फसलों को नुकसान पहुंचा। यहां बाजरा, ग्वार, मूंग और कपास के खेतों में अभी भी दो से तीन फुट तक पानी खड़ा है। उधर, ज्यादा बारिश होने से गांव बिहाली में बना बांध टूट गया, उस पानी ने भी कई गांवों में फसलों को नुकसान पहुंचाया है। गांव फतनी, राजपुरा, ताजपुर व तुर्कीवास में बाजरा और ग्वार की फसल खराब हो गई है। उनिंदा व बिहाली में करीब तीन फुट पानी खेतों में खड़ा है। गांव भीलवाड़ा में भी खेतों में पानी भर गया है। इसी तरह निजामपुर के गांव कारोली, मारोली, मेघोत हाला, मेघोत बिंजा, तलोट व घाटाशेर में खेतों में पानी खड़ा है।
बारिश के पानी ने जिले में ज्यादातर जगह फसलों को नुकसान पहुंचाया है लेकिन कुछ जगह यह फायदेमंद भी रहा है। नांगल चौधरी बेल्ट में फसलों की सिंचाई के लिए नहरी पानी का इंतजाम नहीं है। यहां के किसान पूरी तरह सिंचाई के लिए बारिश पर ही निर्भर करते हैं। बाजरा की बुवाई के बाद लंबे समय तक बारिश न होने के कारण फसल सूखने लगी थी। लेकिन इस बारिश ने उसे संजीवनी दे दी है। नांगल चौधरी के गांव कारोता, कमानियां, दौगली, आंतरी, बिहारीपुर, छापड़ा, नायन, थनवास, बनिहाड़ी, कालबा, बुढ़वाल व अमरपुरा निचले इलाकों में हैं। इसलिए यहां कुछ पानी भरा जरूरी है लेकिन इलाके के किसानों को बारिश से काफी राहत मिली है।