फोटो 05 सीटीएम को ज्ञापन सौंपते संगठन के सदस्य। संगठन
नारनौल। पूर्व सांसद राजकुमार सैनी का कहना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित यूजीसी कानून कमेटी को लेकर सवर्ण समाज के लोगों का विरोध न्याय संगत नहीं है। यह कमेटी एससी ओबीसी समाज के अभ्यर्थियों के लिए नौकरी व प्रमोशन में भेदभाव रोकने के लिए बनाई जा रही है।
इसके लेकर पूर्व सांसद ने शांति पूर्वक प्रदर्शन करते हुए उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर उनकी अनुपस्थिति में सीटीएम डॉ. मंगल सेन को ज्ञापन की प्रति राष्ट्रपति के नाम सौंपी गई।
वहीं इसके लेकर विभिन्न संगठनों के तत्वाधान में पूर्व सांसद राजकुमार सैनी की अध्यक्षता में एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक का संचालन समिति के महासचिव एवं कबीर सामाजिक उत्थान संस्था दिल्ली के वाइस चेयरमैन बिरदी चंद गोठवाल की ओर से किया गया।
पूर्व सांसद ने बताया कि 13 जनवरी को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने क्षमता के संवर्धन से संबंधित विनियम 2026 लागू किया।
उन्होंने कहा कि इसको लेकर सवर्ण समाज के कुछ स्वार्थी लोग मिथ्या प्रचार कर रहे हैं। इसलिए ये लोग यूजीसी कमेटी रद्द करवाने का प्रयास कर रहे हैं जो न्याय संगत नहीं है।
उन्होंने कहा कि इन नियमों के विरुद्ध फैलाए जा रहे भ्रम को अविलंब रोका जाए। सामाजिक न्याय एवं समानता के संवैधानिक संकल्प को और अधिक सुदृढ़ किया जाए व सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिका की सही पैरवी करके इन नियमों को तुरंत लागू किया जाए।