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जिले की गोशालाओं में चारे की बढ़ी किल्लत, उधार में डलवाना पड़ रहा है चारा

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गेहूं की कम पैदावार होने की वजह से जिले की गोशालाओं में तूड़े की परेशानी हो रही है। हालात यह कि गोशाला संचालक उधार में तूड़ा मंगवा कर गायों को खिला रहे हैं। कई गोशालाओं में तूड़े के साथ मटर एवं चने का चरा भी मिक्स कर गायों को डाल रहे हैं।
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इस बार किसानों से मिलने वाला तूड़ा भी नहीं मिल पा रहा, उन्हें भी अपने पालतु पशुओं के लिए चारा खरीदना पड़ रहा है। दूसरे जिलों में चारा बेचने पर सरकार ने पाबंदी लगाकर गोशाला संचालकों को मुश्किलें और भी बढ़ा दी हैं। एक तो जिले में पहले ही गेहूं की पैदावार कम हुई और दूसरा सरकार ने अन्य जिलों में चारा बेचने की पाबंदी लगा दी है। अगर हालात यही रहे तो आने वाले दिनों में तूड़े की कीमत और भी बढ़ने वाली है। सांसद धर्मबीर ने पाबंदी हटाने के लिए प्रदेश सरकार को पत्र लिखा है।
जिला गोशाला प्रधान अरुण कौशिक ने बताया कि जिले भर में 28 पंजीकृत व 2 अपंजीकृत गोशालाएं हैं। जिनमें करीब 26 हजार गोवंश रह रहे हैं। अब इन्हें खिलाने के लिए तूड़ा खत्म हो रहा है। कई गोशालाओं में केवल पांच-सात दिन का चारा बचा है। अगर समय रहते प्रशासन तूड़ा मुहैया नहीं करवाया गया तो गोवंश भूखे मरेंगे जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। इसके लिए डीसी, मंत्री तथा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा जा चुका है।
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ऐेसे हुआ तूड़ा महंगा
पिछले वर्ष तूड़ा 600 रुपये प्रति क्विंटल था लेकिन दिसंबर में बारिश से कड़बी खराब हो गई थी जिससे तूड़ा महंगा हो गया। दिसंबर माह में तूड़े की कीमत 800 से 850 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया था। अब क्षेत्र में गेहूं की पैदावार पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम हुई है। इस वजह से तूड़े की कमी हो गई। साथ ही तूड़े की कीमत 1200 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई है।
नहीं आ रहा पहले जितना दान
श्रीगोपाल गोशाला के प्रधान सुरेश यादव ने बताया कि गायों के लिए चारे की व्यवस्था करना एक चुनौती का कार्य हो रहा है। उन्होंने बताया कि हमेशा किसानों से तीन महीने का चारा दान में मिल जाता था। पिछले वर्ष लगभग 150 ट्रैक्टर ट्रॉली चारे की दान में मिली थी लेकिन इस बार तो मात्र 12 ट्रॉली चारे की अब तक मिली हैं। इस समय दानदाताओं को आगे आकर खुलकर दान करना चाहिए।
दो लाख रुपये का तूड़ा लिया उधार
निजामपुर रोड स्थित उपचार गोशाला के प्रधान आकाश यादव ने बताया कि पिछले पांच सात दिन पहले ही डेढ़ लाख रुपये का चारा फतेहाबाद से तथा 50 हजार रुपये सिंघाणा राजस्थान से मंगवाया था। उधार में ही चारा मंगवाया गया था। चारे के पैसे के लिए रोज फोन आते हैं। न तो सरकार से मदद मिल रही और न ही दानादाताओं से सहारा लग पा रहा। मंत्री ओमप्रकाश यादव से आश्वासन तो मिला था लेकिन पैसा अभी नहीं मिला है। अभी दस दिन का चारा है लेकिन उसके बाद वही दिक्कत खड़ी हो जाएगी। पहले वाले पैसे अभी तक नहीं दिए हैं।
एक दूसरे जिले में चारा ले जाने पर कोई पाबंदी नहीं: जेपी दलाल
पशु चारे को लेकर प्रदेश के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जयप्रकाश दलाल ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये दक्षिणी हरियाणा के 4 जिलों के अधिकारियों के साथ बैठक की। जिला महेंद्रगढ़ की तरफ से अतिरिक्त उपायुक्त अनुराग ढालिया ने जिला में चारे से संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत की।
कृषि मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल गोशालाओं में चारे को लेकर गंभीर हैं। भिवानी, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़ तथा रेवाड़ी में गेहूं का उत्पादन कम हुआ है। इसी कारण चारे की कमी हो सकती है। ऐसे में अधिकारी खुद गोशालाओं में जाकर चारे की स्थिति का पता लगाएं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक दूसरे जिले में चारा ले जाने पर कोई पाबंदी नहीं है। इस बारे में जल्द ही सभी जिलों को निर्देश जारी हो जाएंगे। दूसरे राज्यों में ले जाने पर पाबंदी रहेगी। उन्होंने कहा कि सभी गोशाला में जुलाई तक की चारे की व्यवस्था होनी जरूरी है। सभी डीसी यह सुनिश्चित करें कि किसी भी गोशाला में चारे की कमी न रहे। उन्होंने कहा कि सभी जिले इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट आज ही बना कर भेजे ताकि समय रहते कोई व्यवस्था की जा सके।
प्रतिदिन लगता है दो लाख किलो चारा
जिला महेंद्रगढ़ में गोशालाओं की जानकारी देते हुए एडीसी अनुराग ढालिया ने बताया कि जिले में 21 गोशालाएं हैं जिनमें लगभग 20 हजार पशु हैं। इनके लिए हर रोज दो लाख किलो चारे की आवश्यकता होती है। चारे के लिए सामाजिक संस्थाओं से संपर्क किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक चारा दान में मिले।
इस अवसर पर नारनौल एसडीएम मनोज कुमार, महेंद्रगढ़ एसडीएम दिनेश, कनीना एसडीएम सुरेंद्र सिंह, नगराधीश डॉ. मंगलसेन, पशुपालन विभाग के डीडीए डा. भूप सिंह, कृषि विभाग के डीडीए वजीर सिंह व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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