नारनौल। गांव टहला में एक बार फिर से तेंदुआ नजर आया है। खेतों में कार्य कर रहे लोगों ने जैसे ही इसको देखा तो तुरंत सूचना गांव के निवर्तमान सरपंच व वाइल्ड लाइफ के अधिकारियों को दी। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ड्रोन की सहायता से तेंदुए की तलाश शुरू कर दी है।
बता दें कि इसी गांव में लगभग दस दिन पहले भी तेंदुए ने दो लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया था। मंगलवार सुबह करीब 8 बजे गांव टहला में किसान खेत में कार्य कर रहे थे। उसी दौरान वहां से उन्हें तेंदुआ भागता हुआ दिखाई दिया। मौके पर कार्य कर रहे लोगों ने बताया कि उन्होंने इसकी सूचना तुरंत सरपंच रहे विक्रम, वाइल्ड लाइफ अधिकारी व रेंज आफिसर रजनीश यादव को दी। अधिकारियों की टीम ने मौके पर पहुंचकर जाल लगवा दिया। साथ ही ड्रोन की सहायता से तेंदुए की तलाश भी की गई मगर खबर लिखे जाने तक कोई सफलता नहीं मिली।
ग्रामीणों में भय का माहौल
कुछ दिन पहले भी गांव में तेंदुए ने हमला कर दो लोगों को घायल कर दिया था। उसके बाद से ही ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ था। ग्रामीणों का कहना है जंगली जानवरों ने जब से गांवों में घुसना किया है लोगों ने पशु पालने छोड़ दिए हैं। इसके अलावा भेड़ बकरी पालन करने वाले लोग भी भय के कारण यह कार्य छोड़ चुके हैं।
अधिकारी बोले पैरों के निशान से ढूंढने का प्रयास
वाइल्ड लाइफ इंस्पेक्टर देवेंद्र सिंह का कहना है कि जैसे ही उनकी टीम को इसकी सूचना मिली कि तेंदुआ फिर से देखा गया है तो तुरंत मौके पर पहुंच गए थे। इसके बाद ड्रोन की सहायता से उसको तलाश किया जा रहा है। तेंदुए के पैरों के निशान देखे गए हैं। तेंदुए के पदचिन्हों को देखकर भी उसको पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
वन्य जीव अधिकारी देवेंद्र ने बताया कि पहाड़ी इलाकों में खनन के चलते ब्लास्टिंग हो रही है। ऐसे में जंगली जानवर भयभीत होकर बस्तियों की ओर आ रहे है। खासकर राजस्थान की अरावली पहाड़ियों में बड़ी संख्या में तेंदुए व लकड़बग्गे बस्ती की ओर खाने की तलाश में आ रहे है। इलाके में इनकी कितनी संख्या है इसकी सही जानकारी उपलब्ध नहीं है।
जंगली जानवरों को पकड़ने के लिए गुरुग्राम से बुलाई जाती है टीम
जिले में जंगली जानवरों को पकड़ने के लिए न तो विशेषज्ञ है और न ही पर्याप्त साधन है। इसलिए उनको पकड़ने के लिए गुरुग्राम से टीम बुलाई जाती है।