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कनीना को हलका बनाने के लिए कस्बावासियों ने बनाई रणनीति

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नेताजी सुभाषचंद्र बोस पार्क कनीना में लोगों को संबोधित करते अधिवक्ता विनय यादव। संवाद - फोटो : Narnol
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कनीना को हलका बनाने के लिए रविवार को कस्बावासियों की बैठक पूर्व प्रधान एवं पार्षद मास्टर दलीप सिंह की अध्यक्षता में नेताजी सुभाष चंद्र बोस पार्क में हुई। बैठक में 31 सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई, जिसके सदस्य जल्द ही बैठक कर आगे की रणनीति बनाएंगे।
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कमेटी में अधिवक्ता विनय यादव, नपा के पूर्व प्रधान राजेंद्र लोढ़ा, मास्टर दलीप सिंह, महेश बोहरा, दीपचंद यादव, रतनलाल शर्मा, सुरेश शर्मा, सुमेर चेयरमैन, हरेंद्र शर्मा, रामपाल, सुमेर मैनेजर, मनोज पार्षद, कृष्ण प्रकाश, अनिल शर्मा, मास्टर कृष्ण, रोकी पार्षद, मनोज रोहिल्ला, हैडमास्टर बिजेेंद्र सिंह, राज सिंह, विक्रम सिंह, सुशील मित्तल, यादवेंद्र, सूबेदार मोहर सिंह, विजय चेयरमैन, सुरेंद्र अशोक चेयरमैन, जसवंत सिंह आदि को चुना गया है। बैठक के दौरान समाजसेवी दीपचंद यादव ने कहा कि कनीना खंड के तहत आने वाले सभी 55 गांवों के लोगों को महापंचायत के लिए आमंत्रित किया जाएगा। इस मौके पर अन्य लोगों ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए।
बता दें कि कनीना को राजनीति का गढ़ माना जाता है। आजादी के बाद 1952 में हुए पहले चुनावों में कनीना हलका हुआ करता था। कनीना के ही सूबेदार ओमकार सिंह ने विधानसभा का चुनाव जीतकर कनीना को राजनीति के पन्ने में शामिल करा कनीना को एक नई पहचान दी। अब फिर से विभिन्न संगठनों ने कनीना को हलका बनाने की मांग उठाई है। सन् 1952 में पेप्सू राज्य हुआ करता था और कनीना हलका हुआ करता था। इसके बाद 1978 में तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल ने कनीना हलके को तोड़कर हलका जाटूसाना में शामिल कर दिया। इसके कुछ गांव महेंद्रगढ़ विधानसभा व कुछ गांव जाटूसाना विधानसभा क्षेत्र में जोड़ दिए गए। कनीना के राजनेता आठ बार विधायक सहित दो बार सांसद व केंद्रीय मंत्री के पद पर रह चुके हैं। 27 मार्च 1952 को पहली बार जनसंघ पार्टी से कनीना हल्के से कनीना के सूबेदार ओमकार सिंह विधायक रहे। इसके बाद 1954 में दोबारा से चुनाव हुए और 28 फरवरी 1954 को सूबेदार लाल सिंह विधायक बने। 21 फरवरी 1967 को राव दलीप सिंह आजाद उम्मीदवार के रूप में जीतकर विधानसभा पहुंचे, लेकिन एक साल बाद फिर से दोबारा चुनाव हुए और 12 मई 1968 को विशाल हरियाणा पार्टी से दोबारा फिर राव दलीप सिंह विधायक चुने गए, 11 मार्च 1972 को तीसरी बार फिर से दलीप सिंह विधानसभा का चुनाव लड़े और विशाल हरियाणा पार्टी से विधायक के पद पर रहे, 12 जून 1977 को चौथी बार हरियाणा विशाल पार्टी से चुनाव जीतकर विधायक बने। 1977 में कनीना के कर्नल रामसिंह रेवाड़ी विधानसभा क्षेत्र से पहला चुनाव लड़ा और विधायक चुने गए वे हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष के पद पर रहे, इसके बाद 19 मई 1982 को दोबारा से विधायक बनकर परिवहन मंत्री के पद पर रहे। कर्नल रामसिंह 1991 में कांग्रेस पार्टी से पहली बार सांसद का चुनाव जीतकर सांसद बने। 1996 में दोबारा से सांसद का चुनाव लड़ा और भाजपा पार्टी से चुनाव जीतकर केंद्रीय मंत्री के पद पर रहे। अब फिर से लोगों के द्वारा कनीना को हलका बनाए जाने की मांग जोर शोर से उठाई जा रही है।
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इस मौके पर व्यापार एकता मंच के प्रधान महेश बौहरा, आर्य समाज के प्रधान मोहर सिंह आर्य, पूर्व प्रधान राजेंद्र सिंह लोढ़ा, पार्षद मुकेश रोकी, पार्षद कमल यादव, पार्षद मास्टर दलीप सिंह, अधिवक्ता विनय यादव, अरविंद यादव, हैडमास्टर कृष्ण प्रकाश, नपा उपप्रधान अशोक ठेकेदार, पार्षद ओमप्रकाश यादव, प्रधान विजय यादव, सुरेश वशिष्ट, मैनेजर सुमेर सिंह, प्रचार मंत्री मास्टर कृष्ण यादव, होशियार सिंह लंगड़ा, राज भल्ली, रामकिशन शर्मा सहित अनेक कस्बावासी उपस्थित रहे।
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