महेंद्रगढ़। जंगल में सन्नाटा था। नदी किनारे श्रवण कुमार पानी भर रहे थे। तभी झाड़ियों के पीछे से एक बाण सनसनाता हुआ आया और पूरा वन श्रवण की चीख से कांप उठा। मंच पर घायल पड़े श्रवण की कराह सुनकर राजा दशरथ ठिठक गए, अपराध बोध से उनके कदम लड़खड़ा गए। पंडाल में बैठे दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
श्री हनुमान रामलीला के मंच पर श्रवण कुमार नाटक का मंचन किया गया। रामलीला प्रधान राजेश सैनी ने बताया कि शांतनु की भूमिका में प्रथम भारद्वाज, ज्ञानवती में संदीप तायल, श्रवण कुमार में जितेंद्र प्रजापत, दशरथ में जय सिंह सैनी और गुरु वशिष्ठ में रोबिन गोरा ने बखूबी अभिनय किया। निदेशक मोनू सैन, कमल सैनी, भूपसिंह सोनी, संजय बछोदिया, नरेश खन्ना सहित अनेक कलाकार मौजूद रहे।
आदर्श रामलीला में भी श्रवण लीला
श्री आदर्श रामलीला कमेटी के शक्तिपीठ रंगमंच पर तीसरी रात श्रवण कुमार की लीला ने सेवा और पुत्र-वियोग की कथा से पूरे पंडाल को भावुक कर दिया। मुख्य अतिथि खेड़ी तलवाना के सरपंच रामनिवास बंसल रहे और अध्यक्षता हरीश भारद्वाज ने की। लीला की शुरुआत नेत्रहीन माता-पिता की सेवा में लीन श्रवण कुमार से हुई।
दिग्विजय लीला का प्रभावशाली हुआ मंचन
श्री रामलीला परिषद के रंगमंच पर दूसरी रात दिग्विजय लीला का प्रभावशाली मंचन हुआ। कलाकारों ने रावण के पराक्रम, अहंकार और शिव भक्ति के प्रसंग जीवंत किए। रावण के कैलाश पर्वत उठाने और भगवान शंकर के प्रसन्न होकर उसे चंद्रहास तलवार देने के दृश्य खास आकर्षण रहे। रावण की भूमिका में रामचंद्र जांगड़ा, शंकर में सुनील यादव, नंदी में अतुल शर्मा, इंद्र में कुलदीप तिवाड़ी, मेघनाद में हेमंत शर्मा और वेदवती में विक्की प्रजापति ने शानदार अभिनय किया।
फोटो संख्या:70 हनुमान रामलीला कमेटी में श्रवण नाटक का मंचन करते कलाकार--संवाद
फोटो संख्या:70 हनुमान रामलीला कमेटी में श्रवण नाटक का मंचन करते कलाकार--संवाद