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दुकानदारों ने पुलिस विभाग को दिया नोटिस का जवाब, न्यायालय के आदेशों के बाद करेंगे खाली

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पुलिस द्वारा अपनी जमीन से कब्जा हटवाने के लिए एक सप्ताह पूर्व दुकानदारों को दिए गए नोटिस का जवाब दुकानदारों द्वारा वीरवार को दिया गया है। दुकानदारों ने अपने बचाव में पुलिस अधीक्षक कार्यालय को लिखित जवाब भेजा है। दुकानदारों ने पुलिस विभाग पर पैमाइश में नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए न्यायालय के आदेशों पर दुकान खाली करने की बात कही है। दुकानदार रोशनलाल, सुरेश सैनी, गोपेश मेहता, शीशपाल, योगेश, राजु, जीतेंद्र चौधरी ने बताया कि उन्होंने नगरपालिका से जगह किराए पर लेकर दुकान की हुई है। इन दुकानों का किराया नियमित रूप से नगरपालिका को अदा कर रहे हैं। इस बारे में नगरपालिका के साथ दुकानदारों का कोई विवाद नहीं हैँ। दुकानदारों ने बताया कि इस स्थान पर पिछले लगभग 21 वर्षो से अधिक समय से नगरपालिका के तहत बतौर किरायेदार काबिज चले आ रहे है। दुकानदारों ने न ही किसी की संपत्ति पर अतिक्रमण किया है और न ही नाजायज कब्जा किया है।
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पुलिस विभाग की नहीं है जमीन:
दुकानदार कानूनी रूप से अपना व्यापार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी दुुकान जिस भूमि पर बनी हुई है यह भूमि पुलिस विभाग की नहीं है और ना ही हमारी दुकान संबंधित खसरा नंबर जो पुलिस विभाग के स्वामित्व का बताया गया है का भाग है बल्कि यह नगरपालिका महेंद्रगढ़ के स्वामित्व की संपत्ति है।
दुकानदार बोले उनके सामने नहीं हुई पैमाइश:
पुलिस अधीक्षक को भेजे अपने जवाब में दुकानदारों ने बताया कि जिस पैमाइश रिपोर्ट का हवाला विभाग द्वारा नोटिस में दिया गया है ऐसी कोई पैमाइश दुकानदारों के सामने नहीं हुई है। अगर पुलिस विभाग ने पैमाइश कराई है तो न ही दुकानदारों को नोटिस दिया ना ही सुनवाई का अवसर प्रदान किया, ना रिपोर्ट की प्रति दी गई। पुलिस विभाग के कुछ कर्मचारियों ने राजस्व विभाग के कर्मचारियों से मिलकर झूठी रिपोर्ट बिना किसी पैमाइश के मनमाने तरीके से तैयार करवा ली। निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
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न्यायालय के आदेशों पर होगी आगामी कार्रवाई
दुकानदारों ने कहा कि इस प्रकार के नोटिस के माध्यम से जबरन ताकत के बल पर या नाजायज तरीके से पुलिस कार्रवाई के माध्यम से और सक्षम न्यायालय का आदेश बेदखली प्राप्त किए बगैर मौके से बेदखल करने का कोई कानूनी प्रक्रिया या विधान नहीं है। दुकानदारों ने कहा कि एक सप्ताह पूर्व विभाग द्वारा जारी नोटिस गलत व तथ्यहीन है। जब तक सक्षम न्यायालय द्वारा हमारे विरुद्घ कोई आदेश बेदखली पारित ना हो तब तक हमारे कब्जा व इस्तेमाल में किसी भी प्रकार से दखल न किया जाए।
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