संवाद न्यूज एजेंसी
नारनौल। अखिल भारतीय राज्य सरकारी पेंशनर्स फेडरेशन के राज्य प्रेस सचिव धर्मपाल शर्मा ने कहा कि कर्मचारियों ने यूनाइटेड पेंशन स्कीम (यूपीएस) को नकार दिया है। ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) के लिए राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पीएफआरडीए एक्ट रद्द कर पुरानी पेंशन लागू करने की मांग की अनदेखी कर एकतरफा तरीके से यूपीएस को लागू किया था। सरकार के भारी भरकम प्रचार के बावजूद 30 सितंबर तक 24,66,314 लाख एनपीएस केंद्रीय कर्मचारियों में से केवल 97,094 ने ही यूपीएस में शिफ्ट किया है। यह संख्या मात्र 3.93 ही है।
इससे बिल्कुल स्पष्ट है कि कर्मचारियों ने यूपीएस को लगभग नकार दिया है। शर्मा ने बताया कि जिन राज्य सरकारों ने यूपीएस को लागू किया है, वहां भी कर्मचारियों ने इस नकारते हुए ओपीएस की मांग की है।
उन्होंने बताया कि यूपीएस में कर्मचारी के वेतन का दस प्रतिशत और सरकार के खाते से 18.5 प्रतिशत की कटौती होती है और इस 28.5 प्रतिशत, प्रति कर्मचारी, प्रति महीने एकत्रित होने वाली राशि को निजी क्षेत्र में निवेश किया जाता है।
इसी प्रकार एनपीएस में कटौती होने वाली 24 प्रतिशत राशि को निजी क्षेत्र में निवेश किया जाता है जबकि ओपीएस में जीपीएफ की कटौती होती है और उस राशि का इस्तेमाल सरकार विकास कार्यों में खर्च कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि अब यह बिल्कुल स्पष्ट हो गया है कि यूपीएस की मांग कर्मचारियों नहीं थी, यह मांग कारपोरेट क्षेत्र की थी। उन्होंने बताया कि जब तक केंद्र सरकार पेंशन फंड रेगुलेटरी डवलपमेंट अथारिटी एक्ट ( पीएफआरडीए) को रद्द कर पुरानी पेंशन लागू नही करती, कर्मचारियों का आंदोलन जारी रहेगा।