नारनौल। गुरुग्राम स्थित एसजीटी यूनिवर्सिटी के सभागार में आयोजित तीन दिवसीय संशोधन परिषद कार्यशाला में हरियाणा की प्रसिद्ध लोकगायिका एवं लोकसाहित्यकार डॉ. कृष्णा कुमारी आर्या ने लोकगीतों और रागनियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस कार्यशाला का विषय भारतीय लोकसंस्कृति, लोकजीवन और सामाजिक चेतना के निर्माण में लोकनायकों एवं लोकनायिकाओं की भूमिका रहा।
उन्होंने अपने शोध से जुड़े लोकगीतों का सजीव गायन भी किया जिसे सुनकर पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उन्होंने कहा कि लोकगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, सद्भाव और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने का सशक्त साधन हैं।
लोकसंस्कृति के संरक्षण और उत्कृष्ट शोधपत्र प्रस्तुति के लिए डॉ. आर्या को स्मृति चिन्ह, प्रमाण पत्र एवं पत्र संकलन भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यशाला में देशभर से आए शिक्षाविदों, साहित्यकारों और विद्वानों ने भाग लिया।