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शहर में पीलिया बीमारी से बच्चे की मौत का मामला आया सामने

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मतृक चिन्मय का फाईल फोटो । - फोटो : Narnol
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नारनौल। शहर में एक 15 वर्षीय बच्चे की पीलिया के कारण मौत होने की मामला सामने आया है। बच्चे का इलाज महेंद्रगढ़ रोड पर स्थित एक निजी अस्पताल में चल रहा था। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने मृतक बच्चे के परिजनों को डेंगू होने की भी बात कही थी। मगर अब अस्पताल चिकित्सक डेंगू जांच के लिए सैंपल भेजने की बात कह रहे हैं। वहीं जिला स्वास्थ्य विभाग को भी अभी इस संबंध में कोई रिपोर्ट नहीं मिली है।
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मृतक के परिजनों के अनुसार 15 वर्षीय चिन्मय को सोमवार-मंगलवार को हलका बुखार आया था। बुधवार सुबह छह चिन्मय को उन्होंने महेंद्रगढ़ रोड स्थित अग्रवाल नर्सिंग अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती करवाया। यहां चिकित्सकों द्वारा उसकी जांच की गई। इसमें पीलिया होने की पुष्टि हुई। दोपहर बाद बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक चिन्मय अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र था। जोकि ग्यारहवीं कक्षा का छात्र था तथा मॉडल संस्कृति स्कूल नारनौल में पढ़ाई करता था। चिन्मय की एक बड़ी बहन भी है।
- डेंगू-मलेरिया को लेकर सीएमओ ने ली बैठक
मच्छर जनित बीमारी डेंगू व मलेरिया के संबंध में सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने बुधवार को चिकित्सा अधिकारियों की बैठक ली। इसमें उप सिविल सर्जन मलेरिया डॉ. संजय बिश्नोई भी मौजूद रहे। सिविल सर्जन ने बताया कि मानसून सीजन के कारण मच्छर जनित बीमारी मलेरिया व डेंगू का प्रकोप बढ़ रहा है। जिले में अब तक दो मलेरिया के केस आ चुके हैं। जबकि 12 के करीब डेंगू के मामले भी आ चुके हैं। ऐसे में हमें और अधिक सर्तक रहने की जरूरत है। जिला में 133 स्वास्थ्य विभाग की टीमें कार्य कर रही हैं। इस समय जिसे भी बुखार है वह नागरिक अस्पताल नारनौल या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर खून की जांच करवाएं व डॉक्टर से सलाह लें। नागरिक अस्पताल नारनौल व जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर मलेरिया व डेंगू की निशुल्क जांच उपलब्ध है। अगर कोई निजी अस्पताल डेंगू के मरीज को दाखिल करता है तो उसकी सूचना विभाग को दें। सिविल सर्जन ने कहा कि एलिसा टेस्ट से कंफर्म होने पर ही डेंगू की पुष्टि मान्य है।
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- डेंगू व मलेरिया से बचाव के लिए नागरिक ये करें
सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि घरों के आसपास गड्ढों को मिट्टी से भरवाएं। कूलर, होदी, टंकी व पानी से भरे हुए बर्तन सप्ताह में एक बार अवश्य खाली करें। शरीर ढक कर रखें। मच्छर रोधी दवा, क्रीम व मच्छरदानी का प्रयोग करें। पूरी बाजू के कपड़े पहने। नागरिक अपने स्तर पर दवाई ना लें बुखार आने पर अस्पताल से दवाई लें हैंडपंप और नल के पास पानी जमा न होने दें। स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों के लिए डेंगू के एलिसा टेस्ट के लिए 600 रुपए के रेट निर्धारित किए हैं।
- इस वर्ष 12 डेंगू के मामले आए
जिला में वर्ष 2016 में मलेरिया पॉजिटिव के 24 मामले थे। वर्ष 2017 में 25, 2018 में 22, 2019 में एक तथा 2020 में कोई पॉजिटिव केस नहीं आया था। इस वर्ष अब तक एक पॉजिटिव केस आया है। वहीं अगर डेंगू की बात करें तो वर्ष 2016 में डेंगू के 3 केस, 2017 में 3, 2018 में 4, 2019 में 10, 2020 में 7 तथा 2021 में अब तक 12 डेंगू के मामले आ चुके हैं। इस बार डेंगू से अधिक सावधान रहने की जरूर है। इस बार बारिश भी अच्छी हुई है। ऐसे में लोगों को बहुत अधिक सावधानी बरतनी होगी तथा अपने घरों में गमले, कूलर व खाली बर्तन व सामान में पानी एकत्रित न होने दें।
- वर्जन
डेंगू से बच्चे की मौत मामले सूचना या रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को नहीं मिली है। अगर ऐसा है तो जांच करवाई जाएगी। डेंगू से रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा 133 टीमें गठित की गई है। जोकि लोगों को जागरूक कर रही है। लोगों को भी सावधानी बरतने की जरूरत है। बुखार की शिकायत पर होने पर तुरंत अस्पताल में जाकर चेक करवाए।---डॉ. अशोक कुमार, सिविल सर्जन नारनौल।
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