सड़क हादसे में घायल नागरिक अब आयुष्मान भारत योजना के पैनल के अस्पतालों में 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज का हकदार है। इसके अलावा हिट एंड रन मामले में पीड़ित को मुआवजा मिलता है। यह जानकारी उपायुक्त डॉ. विवेक भारती ने वीरवार को लघु सचिवालय में सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी व रोड सेफ्टी के संबंध में अधिकारियों की बैठक में दी।
उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य सड़क दुर्घटनाओं के कारण होने वाली मौतों को रोकना है। इस प्रतिबद्धता को दोहराते हुए सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 162 के तहत मोटर वाहनों के उपयोग से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को नकद उपचार प्रदान करने के लिए एक योजना शुरू की है।
उन्होंने कहा कि सड़क हादसे में पीड़ित नागरिक आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जेएवाई) के तहत आघात और बहु-आघात के लिए स्वास्थ्य लाभ पैकेज के अनुसार दुर्घटना की तिथि से अधिकतम 7 दिनों की अवधि के लिए प्रत्येक दुर्घटना के लिए प्रति 1.5 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज का हकदार है।
इसके अलावा उपायुक्त ने बताया कि हिट एंड रन मामले में पुलिस को तुरंत पीड़ित को अस्पताल में भर्ती करना है। अगर हादसे के जिम्मेदार व्यक्ति का पता नहीं चलता है तो उस सूरत में घायल को 50 हजार व मौत होने पर उसके परिजनों को 2 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जाता है।
जनवरी माह में 219 बसों की गई जांच
आरटीए सचिव मनोज कुमार ने बताया कि पुलिस व आरटीए विभाग द्वारा जनवरी माह में 219 स्कूल बसों की जांच की गई। इनमें आरटीए विभाग द्वारा 52 बसों की जांच की गई। इस दौरान 6 बसें तय मानकों के अनुरूप नहीं चल रही थी। ऐसे में उनका चालान किया गया। उन्होंने बताया कि इस माह सड़क सुरक्षा माह के तहत आरटीए विभाग द्वारा 35 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करवाए गए। वहीं इस दौरान लगभग 2 हजार वाहनों को रिफ्लेक्टिव टेप लगाई गई। रेडक्राॅस के माध्यम से दो माह में 2000 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया।