नारनौल। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कमजोर विद्यार्थियों को अब उनकी आवश्यकता के अनुसार अलग से पढ़ाया जाएगा। शिक्षा विभाग की ओर से ‘कैच-अप अभियान’ के तहत सोमवार से जिले के सभी सरकारी स्कूलों में विशेष रिकवरी क्लास शुरू कर दी गई है।
अभियान के तहत कमजोर विद्यार्थियों को चिह्नित कर रोजाना 20 से 30 मिनट अतिरिक्त समय देकर उनकी शैक्षणिक कमियों को दूर किया जाएगा। खास बात यह है कि कमजोर बच्चों को पूरी कक्षा से अलग करके पढ़ाने के बजाय उनकी जरूरत के अनुसार व्यक्तिगत सहयोग दिया जाएगा।
शिक्षा विभाग ने इस विशेष अभियान को अगस्त से जनवरी तक करीब छह माह चलाने का निर्णय लिया है। अभियान की शुरुआत में पहले 15 दिन विद्यार्थियों के आधारभूत ज्ञान और पूर्व में पढ़ाए गए पाठ्यक्रम की पुनरावृत्ति कराई जाएगी।
इसके बाद शिक्षकों की जिम्मेदारी होगी कि वे यह पहचानें कि किस विद्यार्थी को किस विषय या पाठ में सबसे अधिक कठिनाई आ रही है। इसके आधार पर संबंधित बच्चे को अतिरिक्त अभ्यास और मार्गदर्शन दिया जाएगा।
जिला परियोजना समन्वयक डॉ. विक्रम सिंह ने बताया कि कैच-अप अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा सीखने में पीछे न रह जाए। प्रत्येक विद्यार्थी का नियमित आकलन किया जाएगा और जिस विषय में कमजोरी सामने आएगी, उसी के अनुरूप अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान विद्यार्थियों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय कहानी, चित्र, गतिविधियों, गणित किट, पुस्तकालय और स्थानीय उदाहरणों के माध्यम से पढ़ाने पर जोर रहेगा।
अभियान के तहत हर सप्ताह विद्यार्थियों का मूल्यांकन किया जाएगा। जिन बच्चों की कमजोरियां दूर हो जाएगी, उन्हें सामान्य कक्षा शिक्षण में शामिल कर दिया जाएगा, जबकि जिन विद्यार्थियों को अभी अतिरिक्त सहायता की जरूरत होगी, उन पर विशेष फोकस जारी रहेगा।
इस तरह बच्चों की प्रगति को लगातार दर्ज किया जाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि रिकवरी क्लास का उद्देश्य बच्चों पर अतिरिक्त दबाव बनाना नहीं, बल्कि गलती को सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा मानते हुए उन्हें सहज माहौल में आगे बढ़ाना है।
कक्षा तीन से आठ तक के विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अभियान की प्रगति को पीटीएम के माध्यम से अभिभावकों से भी जोड़ा जाएगा।