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जिला अस्पताल में पिछले डेढ़ वर्ष से नहीं बच्चों को बुखार में दी जाने वाली पैरासिरप

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जिला अस्पताल में पिछले डेढ़ वर्ष से बच्चों को खांसी, जुकाम में दी जान वाली पैरासिरप नहीं है। पिछले दो महीनों से भिवानी वेयर हाउस में भी स्टाक नहीं है। सबसे खास बात यह है कि विकल्प के तौर पर भी दूसरी कोई सिरप नहीं है। चिकित्सक पैरासिरप लिख तो देते हैं लेकिन परिजनों को वो बाजार से ही लेनी पड़ती है। इसके अलावा दर्दनाशक (डिकलोफैनिक) गोली भी अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। अस्पताल में न बच्चों के लिए दवाइयां और न ही चिकित्सक। दर्दनाशक एवं बुखार की दवाइयां सामान्य दवाइयों में गिनी जाती हैं तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में कितनी गंभीर है।
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बता दें कि जिले के अस्पताल में डेढ़ वर्ष से बच्चों को बुखार में दी जाने वाली पैरासिरप नहीं है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिछले वर्ष लॉकडॉउन के दौरान मई या जून माह में यह दवाई खत्म हुई थी। उसके बाद से अभी तक पैरासिरप नहीं आई है। काफी दिनों से विकल्प के तौर पर दी जाने वाली आईबुप्रोफेन सिरप भी नहीं आ रही है। चिकित्सक की ओर से टेबलेट तथा पैरासिरप दोनों ही लिखी जाती है। 0 से 5 साल के बच्चों टेबलेट नहीं लिए जाने की वजह से परिजन को बाजार से ही पैरासिरप खरीदनी पड़ रही है।
260 दवा में मात्र 120 दवाइयां
सरकार की ओर से राजकीय अस्पतालों में 260 दवाइयां की स्वीकृति मिली हुई है। इनमें खांसी, जुकाम, बुखार, एलर्जी, दर्द सहित अन्य प्रकार की दवाइयां शामिल हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में अस्पताल में मरीजों के लिए 120 दवाइयां ही रहती हैं। सबसे अधिक दवाइयां फिजिशियन की ओर से दी जाती है लेकिन जिले में पिछले दो वर्षों से फिजिशियन की पोस्ट भी खाली पड़ी है।
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बाल रोग विशेषज्ञ नहीं होने से ओपीडी हुई आधी से भी कम
जनवरी महीने के अंत जिला अस्पताल में कार्यरत बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप यादव एवं डॉ. मदन ने अपना इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद अभी तक कोई स्थायी बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं आया है। वर्तमान में महेंद्रगढ़ अस्पताल में नियुक्त डॉ. मुकेश शर्मा को डेपुटेशन पर लगाया गया है। अस्पताल में बच्चों की ओपीडी आधी से भी कम हो गई है। जनवरी महीने में लगभग 250 ओपीडी होती थी लेकिन अब ओपीडी की संख्या लगभग 100 रह गई है। ओपीडी कम होने की वजह मौसम और चिकित्सकों की कमी दोनों ही हो सकती है।
भिवानी स्टोर में दवाइयां की कोई कमी नहीं है। दो महीने से पैरासिरप स्टोर में नहीं है। इससे पहले काफी रहती थी। जहां भी दवाइयां नहीं है, तो पोर्टल के माध्यम से भिवानी स्टोर में डिमांड भेजें। सरकार की ओर से दवा खरीदने के लिए बजट भी दिया हुआ है। बजट से भी दवाइयां खरीदी जा सकती हैं। -सतपाल, चीफ फार्मासिस्ट, नारनौल।
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