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बिना ड्राइवरों के धूल फांक रही नागरिक अस्पताल में नई एंबुलेंस

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नागरिक अस्पताल में खड़ी नई एंबुलेंस । - फोटो : Narnol
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मनोहर सरकार भले ही प्रदेश वासियों को बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं देने का दावा कर रही हो लेकिन धरातल पर कुछ अलग है। घायल को जीवन दान देने वाला वाहन (एंबुुलेंस) पर ड्राइवर नहीं है। ड्राइवरों के अभाव में नई एंबुलेंस धूल फांक रही हैं। जिले की 30 सरकारी एंबुलेंस पर 90 ड्राइवरों की बजाय मात्र 44 ड्राइवर काम कर रहे हैं। जो ड्राइवर काम कर रहे हैं उनमें से कई ड्राइवरों को 12 से 14 घंटे ड्यूटी करनी पड़ रही है। ऐसे में एंबुलेंस ड्राइवर को परेशानी उठानी पड़ती है। कुछ महीने पहले जिले को 11 नई एंबुलेंस मिली थीं और उसके लिए 33 ड्राइवर लगाए जाने थे लेकिन सरकार की ओर से ऑउटसोर्सिंग पॉलिसी बंद किए जाने के बाद उन पर अभी तक ड्राइवर नहीं लग पाए हैं। ऐसे में नई एंबुलेंस खड़ी धूल फांक रही हैं
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जिले मेें 19 पुरानी एंबुलेंस हैं। एक एंबुलेंस पर आठ-आठ घंटे की ड्यूटी के अनुसार तीन ड्राइवर की आवश्यकता होती है लेकिन ड्राइवर के अभाव में एंबुलेंस पर कार्यरत पुराने ड्राइवरों पर 12 से 14 घंटे ड्यूटी करनी पड़ती है। रात को ड्यूटी करने वाले एंबुलेंस चालक की कई बार नींद भी पूरी नहीं हो पाती। एंबुलेंस का कार्य मरीजों एवं घायल व्यक्ति को अस्पताल ले जाना तथा हायर सेंटर ले जाने का होता है। ऐसे में ड्राइवर चुस्त होना बहुत आवश्यक है।
नेशनल हेल्थ मिशन के तहत जिले को 11 नई एंबुलेंस मिली थीं। इनके लिए 33 ड्राइवरों की नियुक्ति की जानी थी। सरकार की ओर से न तो ड्राइवरों की स्थायी नियुक्ति की गई और ऑउट सोर्सिंग पॉलिसी भी बंद कर दी। तीन चार एंबुलेंस जैस तैसे कर चलाई जा रही हैं। शेष एंबुलेंस धूल फांक रही है।
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नागरिक अस्पताल को 11 नई एंबुलेंस मिली थी जिसमें चार एंबुलेंस को चलाया जा रहा है। ड्राइवरों की कमी होने के कारण नई एंबुलेंस खड़ी हैं। सरकार को बार-बार रिमाइंडर भेजा जा रहा है। बिना ड्राइवरों के गाड़ी खड़ी है। ड्राइवरों की कमी पहले से ही है। 44 ड्राइवरों से अतिरिक्त गाड़ी चलवाकर काम लिया जा रहा है ताकि परेशानी ना हो। -डॉ. हर्ष कुमार, डिप्टी सीएमओ, नागरिक अस्पताल, नारनौल।
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