नांगल चौधरी। नांगल चौधरी क्षेत्र में एक हजार फीट की गहराई तक भूजल नहीं मिल रहा इसलिए सरकार द्वारा खंड को डार्कजोन घोषित कर दिया गया। नियमानुसार डार्कजोन को नहरी पानी प्राथमिकता के आधार पर मिलना चाहिए। किंतु नहर निर्माण के 38 साल बाद भी क्षेत्र की टेल पर पानी नहीं पहुंचा। इस कारण बंजर रकबे में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। परेशान किसानों को पशुचारा, अनाज की चिंता सताने लगी है।
नांगल चौधरी तहसील के अंतर्गत 100 से अधिक गांवों में 65 हजार एकड़ से अधिक कृषि योग्य जमीन है। सिंचाई व्यवस्था को लेकर विभाग द्वारा 1978 में करीब 47 किलोमीटर लंबी शहबाजपुर एवं नोलपुर डिस्ट्रीब्यूटरी का निर्माण करवाया था। पानी लिफ्टिंग के लिए 13 पंप हाउसों की व्यवस्था है। डिमांड के मुताबिक पानी मिलने पर दोनों डिस्ट्रीब्यूटरी द्वारा 8-10 हजार एकड़ जमीन की सिंचाई हो सकेगी लेकिन डिस्ट्रीब्यूटरी को पर्याप्त पानी की सप्लाई उपलब्ध नहीं हो रही। सरसों बीजाई का उपयुक्त समय बीत चुका, अब किसान गेहूं बीजाई की तैयारी में हैं। लेकिन पलाव नहीं होने के कारण बीजाई पर संकट मंडराने लगा है। लगभग 70 गांवों में माइनर का निर्माण नहीं हुआ, जिनमें 60 हजार एकड़ रकबे में से 45 हजार खाली रह गया। जितनी बीजाई हो चुकी, उसमें चने का रकबा अधिक है।
बारिश नहीं तो नष्ट जाएगी फसल
कृषि विशेषज्ञों की मानें तो सरसों को दो, गेहूं को पांच तथा चने की फसल को एक सिंचाई की जरूरत होती है। दिसंबर-जनवरी महीने में मावठ होने पर किसानों को चने की भरपूर पैदावार मिल जाएगी। मावठ नहीं होने पर चने की फसल पूरी तरह से चौपट हो जाएगी, वहीं 50 प्रतिशत रकबा सरसों का नष्ट हो जाएगा।
डार्कजोन की पानी सप्लाई में कटौती अनुचित
भुंगारका, धोलेड़ा, बिगोपुर, शिमली के ग्रामीणों ने बताया कि नियमानुसार डॉर्कजोन को अतिरिक्त पानी मिलना चाहिए लेकिन सरकार हिस्से का पानी भी नहीं दे रही। अच्छी बारिश नहीं होने के कारण जमीन में नमी नहीं, पलाव होने पर ही बीजाई संभव होगी। परंतु नहरी पानी समस्या बना हुआ है।
पांच साल से खाली रकबे का विवरण
साल खाली रकबा
2012 8 हजार एकड़
2013 4 हजार एकड़
2014 25 हजार एकड़
2015 35 हजार एकड़
2016 45 हजार एकड़
हर साल बढ़ रहा बंजर रकबा
कृषि विभाग के एडीओ डा. सतीश यादव ने बताया कि सरसों की बीजाई का पीक टाइम बीत चुका। 25 नवंबर तक गेहूं की बीजाई कर सकते हैं, लेकिन भूजल के अभाव में गेहूं की बहुत कम बीजाई होगी। बोरवेल सूखने तथा नहरी पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण बंजर भूमि का रकबा निरंतर बढ़ रहा है।