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बायो मेडिकल वेस्ट को उठाने और उन पर बारकोड लगाना जरूरी

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राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड धारूहेड़ा के निर्देशानुसार सभी निजी अस्पतालों में भी बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियम-2016 के अनुसार मेडिकल वेस्ट का निपटान जरूरी है। इसके तहत बायो मेडिकल वेस्ट को उठाने और उन पर बारकोड लगाना होता है।
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सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रधान को इस संबंध में पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि सभी निजी अस्पताल 15 दिन के अंदर-अंदर बायो मेडिकल वेस्ट को उठाने और उन पर बारकोड लगवाकर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से इसका प्रमाणपत्र लेकर इसकी रिपोर्ट सिविल सर्जन कार्यालय में जमा करवाएं। ऐसा नहीं करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
सिविल सर्जन ने बताया कि सरकारी या निजी अस्पताल या कोई अन्य चिकित्सा संस्थान में बायो मेडिकल वेस्ट उठाने का कार्य बारकोड के जरिए किया जाना है। इस नए सिस्टम के तहत बायो मेडिकल वेस्ट बैग में डालने के बाद मशीन से बारकोड एक्टीवेट होगा। इसमें एक स्लिप बैग पर चिपका दी जाएगी। इसकी ऑनलाइन रिपोर्ट प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पहुंच जाएगी।
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निपटान के स्थान पर वही प्रोसेस बारकोड के माध्यम से वजन देखा जाएगा। इस दौरान यदि वजन में अंतर होगा तो तुरंत पता चल जाएगा कि कचरा कहीं बाहर निकाला गया है। ऐसे में बारकोड प्रणाली कचरे को खुले में फेंकने से रोकथाम में विशेष भूमिका है।
सीएमओ ने बताया कि दवा को फेंकना या उसे जलाना स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। यह पर्यावरण के लिए भी खतरनाक है। दवाएं खुले में फेंकने से इसके पशुओं द्वारा खाने का खतरा रहता है। रासायनिक दवाएं हवा में घुलकर उसे जहरीला भी बना सकती हैं। दवाओं को जलाने से निकलने वाले धुएं से सांस, फेफड़ों, त्वचा संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। एक्सपायरी दवाओं का भी एक तय प्रक्रिया के तहत निष्पादन करना होता है। इसी प्रकार अन्य मेडिकल वेस्ट जैसे सिरिंज आदि बाहर फेंकने से बहुत अधिक खतरा मानव के साथ-साथ पशुओं को भी होता है।
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