नागरिक अस्पताल में वैक्सीन के लिए बिना मास्क लगाए खड़े युवक। संवाद
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सरकार के ऑर्डर का पालन करते हुए प्रशासन ने एक जनवरी से बिना मास्क और टीकाकरण प्रमाणपत्र वालों के सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर प्रवेश नहीं देने का आदेश जारी किया गया था, लेकिन नारनौल अस्पताल में पहले ही दिन सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ती नजर आई। अस्पताल में आने वाले मरीजों एवं परिजनों का न तो टीकाकरण प्रमाणपत्र जांचा गया और न ही मास्क। लोग आम दिनों की तरह अस्पताल में प्रवेश कर रहे थे और मास्क भी नहीं लगाए थे। सरकार के आदेशों को लेकर न तो प्रशासन ही गंभीर दिखाई दिया और न ही नागरिक। जिले में कोरोना ने दोबारा दस्तक दे दी है, फिर भी लोग लापरवाही बरत रहे हैं।
मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार देश में कोरोना की तीसरी लहर आने की आशंका है और प्रदेश में तो इसके संकेत भी दिखाई देने लगे हैं। ऐसे में सरकार लोगों का टीकाकरण करने के लिए कुछ कठोर कदम उठा रही है। तीन दिन पहले सरकार ने एक जनवरी से बिना मास्क एवं बिना टीकाकरण वालों के सरकारी कार्यालयों में प्रवेश पर पाबंदी लगाने के आदेश जारी किए थे। शनिवार को अवकाश होने की वजह से कार्यालय बंद रहे, लेकिन अस्पताल ही खुले थे। वैसे अस्पताल में भी भीड़ कम थी, लेकिन वहां पर लोग सामान्य दिनों की तरह आते-जाते नजर आए। अस्पताल प्रशासन की ओर से उनका न तो टीकाकरण प्रमाणपत्र की जांच की गई और न ही मास्क के लिए किसी को टोका जा रहा था। लोगों में सोशल डिस्टेंसिंग भी दिखाई नहीं दे रही थी। सरकार के आदेशों का पालन बिल्कुल ही नहीं हो रहा था। अगर प्रशासन ने सरकारी आदेशों को गंभीरता से लागू नहीं किया और लोग जागरूक नहीं हुए तो निश्चित रूप से महेंद्रगढ़ जिला तीसरी लहर की चपेट में आ सकता है। हालात पहले जैसे ही बनते नजर आएंगे। वैसे जिले में कोरोना ने दस्तक भी दे दी है। शुक्रवार को एक निजी स्कूल के तीन विद्यार्थियों को संक्रमित पाया गया था और एक व्यक्ति की कोरोना की वजह से मौत हो गई थी।
आज में कहीं बाहर गया हुआ था। टीकाकरण प्रमाणपत्र की जांच हुई या नहीं इस बारे में मुझे जानकारी नहीं है। सोमवार को प्रमाणपत्र की भी जांचे जाएंगे और बिना मास्क अस्पताल में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। -डॉ. अशोक कुमार, सिविल सर्जन।