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बीईओ साहब के सामने बच्चे पढ़ने की बजाय खेलने में मशगूल मिले

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पुरानी सराय स्थित प्राथमिक स्कूल की कक्षा में अध्यापक के नहीं होने पर खेलते बच्चे। संवाद - फोटो : Narnol
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प्रदेश सरकारी स्कूलों में शिक्षा स्तर सुधारने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, लेकिन जब अधिकारी ही गंभीर न हों तो स्कूलों में सुधार कैैसे होगा? ऐसा ही मामला खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय नारनौल स्थित स्कूल में देखने के लिए मिला। वीरवार को पौन 11 बजे स्कूल की पड़ताल करने पर बच्चे कक्षा के अंदर खेल रहे थे। कक्षा में कोई अध्यापक नहीं था। माहौल ऐसा था कि जैसे लंच ब्रेक हो रखा हो। वहीं बाहर खंड शिक्षा अधिकारी नारनौल कुर्सी टेबल लगाकर बैठे हुए थे। जब उनसे इसका कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया कि पांच में से तीन अध्यापक छुट्टी पर हैं, इसलिए कक्षा खाली है। इस संबंध में जब जिला शिक्षा अधिकारी सुनील दत्त से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि वो इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी नारनौल से बातचीत करेंगे। अगर ऐसा हुआ है तो गलत बात है।
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बता दें कि सर्दी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं और जिले में न्यूनतम तापमान 6.5 डिग्री तक पहुंच गया है। सरकारी स्कूलों में बच्चों के बैठने एवं कमरों की दशा देखने के लिए विभिन्न स्कूलों की पड़ताल की गई तो खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय नारनौल परिसर की प्राथमिक पाठशाला में ही पांच में से तीन कक्षाएं खाली मिलीं। तीनों कक्षाओं के विद्यार्थी बाहर धूप में बैठे थे। उनके पास बेंच की व्यवस्था नहीं थी, जबकि दो कक्षाओं के विद्यार्थी कमरों के अंदर थे और खेल रहे थे। कक्षा से कुछ दूरी पर ही खंड शिक्षा अधिकारी टेबल कुर्सी डालकर बैठकर धूप सेक रहे थे। उनका कक्षा की ओर कोई ध्यान नहीं था। जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि स्कूल में लगभग 125 विद्यार्थी और पांच अध्यापक है। इनमें से तीन अध्यापक छुट्टी पर हैं। इसलिए कक्षाएं खाली हैं। लेकिन खंड शिक्षा अधिकारी ने इतना नहीं सोचा की कक्षाएं मर्ज करवा दी जाएं। नारनौल खंड में 83 प्राइमरी, 24 मिडिल स्कूल, 08 हाई स्कूल तथा 16 सीनियर सेकेंडरी सहित 131 स्कूल हैं। अगर खंड शिक्षा अधिकारी की आंखों के आगे सबकुछ ऐसा चल रहा है तो शेष स्कूलों के हालात क्या होंगे। ये सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
टूटे हुए थे जंगले, बच्चों के बैठने के लिए नहीं थी ड्यूल डेस्क
राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में लगभग 968 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। शानदार बात यह है कि स्कूल में पिछले दो वर्षों में 250 बच्चों की वृद्धि हुई है, लेकिन इस स्कूल में प्राथमिक कक्षाओं में न तो ड्यूल डेस्क देखने को मिली और खिड़कियां टूटी हुई थीं। वहीं 6 से 8 तक भी छात्राओं के पास बैठने के लिए डेस्क नहीं थी। इन कक्षाओं में लगभग 310 छात्राएं पढ़ रही हैं। सभी को ठंड के अंदर दरी पर बैठना पड़ता है। कई बार तो सर्दी से बचाव के लिए धूप में भी बैठना पड़ता है। इस संबंध में स्कूल प्राचार्य ने बताया कि ड्यूअल डेस्क के लिए उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को लिखा हुआ है। यह प्राइमरी स्कूल दूसरे स्कूल के बच्चे हैं। इसके अलावा पटिकरा स्कूल में भी डेस्क का अभाव दिखा। बच्चे टाट पट्टी पर बैठे हुए मिले।
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हमारे पास डेस्क सर प्लस हैं किसी भी स्कूल की हमारे पास कोई डिमांड नहीं आई। डिमांड आने के बाद उनके पास भेज डेस्क भेज देंगे। बच्चे खेल रहे हैं अधिकारी बैठे हैं, ऐसा हो नहीं सकता। अगर ऐसा हुआ है तो इस मामले में पूछताछ की जाएगी। सुनील दत्त, जिला शिक्षा अधिकारी महेंद्रगढ़

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पटीकरा में टाट पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करते बच्चे। संवाद- फोटो : Narnol

स्कूल में टूटी खिड़की। संवाद- फोटो : Narnol

स्कूल में बाहर धूप में टाट पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करते बच्चें। संवाद- फोटो : Narnol

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