नारनौल। जिले में पुरानी व ऐतिहासिक मूर्तियां, शिलालेख व वस्तुओं को एकत्रित करके संग्रहालय बनाने की योजना है। इसके लिए जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से आह्वान किया है कि ऐसी ऐतिहासिक महत्व की वस्तुओं को जिला प्रशासन को सौंपें। उस वस्तु को संग्रहालय के लिए बनाई जाने वाली गैलरी में हमेशा के लिए वस्तु दान करने वाले व्यक्ति या ग्राम पंचायत का नाम व पता के साथ संजोकर रखा जाएगा।
उपायुक्त अजय कुमार ने बताया कि जल्द ही इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों की एक गैर सरकारी कमेटी बनाई जाएगी। इनके सहयोग से जिले के गांवों से इन चीजों की जानकारी लेकर संबंधित बीडीपीओ के माध्यम से जिला प्रशासन उसे प्राप्त करेगा। जो भी व्यक्ति व संस्था वस्तु उपलब्ध करवाएगी उसका नाम सदा-सदा के लिए संग्रहालय में उस वस्तु के साथ ही लिखा जाएगा ताकि भविष्य में लोगों को इन सामान के बारे में जानकारी रहे। उन्होंने बताया कि इस काम के लिए फिलहाल ये चीजें पूरे रिकॉर्ड के साथ जिला पुस्तकालय में रखने की व्यवस्था की जाएगी। भविष्य में बड़ा संग्रहालय बनाकर इन्हें संजोकर रखा जाएगा।
उन्होंने आम नागरिकों से अपील की है कि शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगह महत्वपूर्ण शिलालेख व मूर्तियां पड़ी रहती हैं। लोगों को उनकी ऐतिहासिक महत्व की जानकारी नहीं होती। ऐसी चीजों को तुरंत संजोकर रखने की जरूरत है। इसी प्रकार पूर्वजों से जुड़ी कोई वस्तु जैसे कोई पुराना हथियार, दस्तावेज, पेंटिंग, कोई पत्र, मानचित्र, मेडल व बैज आदि चीजों को भी जिला प्रशासन एकत्रित करने के लिए आम नागरिकों की सहायता लेगा।
उपायुक्त ने बताया कि ये चीजें एकत्रित होने के बाद टाटा कंसलटेंसी के माध्यम से इनकी प्रमाणिकता जांची जाएगी। आम नागरिक इसमें सहयोग करें। यह बहुत बड़ी प्रक्रिया है।
पुराने जमाने के हल से लेकर बैलगाड़ी तक होंगी संग्रहालय में
संग्रहालय में पुराने दौर के विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए उपयोग होने वाले औजारों को भी एकत्रित किया जाएगा। पुराने जमाने में खेती के लिए प्रयोग होने वाले सामान में बैलगाड़ी, रेहडू, रहट, पानी भरने का चड़स, बैलों का श्रृंगार का सामान, जेली, हल, छाज, दरांती, हंसिया व गंडासी आदि को एकत्रित किया जाएगा। वहीं पुराने ठठेरा का सामान, खादी के कपड़े बनाने के उपकरण, जूते बनाने के उपकरण, पुराने जमाने के श्रृंगार से जुड़ी वस्तुएं, पुराना मटका, चारपाई, मूढ़े, लकड़ी के काम से जुड़े औजार सहित पुराने जमाने में प्रयोग होने वाला हर सामान एकत्रित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में नई पीढ़ियों को ये चीजें देखने को नहीं मिलेंगी। ऐसे में इनके लिए अभी से संग्रहालय बनाने की तैयारियां जरूरी हैं। प्रशासन को दी जाने वाली हर चीज का बाकायदा रिकॉर्ड रखा जाएगा।
सीएमजीजीए के वहाट्सएप पर भेज सकते हैं जानकारी
उपायुक्त अजय कुमार ने बताया कि इस काम के लिए मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी कौस्तुभ विराट को जिम्मेदारी दी गई है। जिले का कोई भी नागरिक उनसे मिलकर अपनी वस्तुएं दान कर सकता है। इसके लिए उनके मोबाइल नंबर 7420873068 पर वहाट्सएप करके वस्तु की जानकारी डाल सकते हैं। इसके बाद संबंधित कमेटी उस सामान को ग्रहण करने की कार्यवाही करेगी। उन्होंने बताया कि यह बहुत बड़ी प्रक्रिया है। आने वाली पीढ़ियों को पुराने जमाने की चीजों से रूबरू करवाने के लिए यह बहुत जरूरी है कि इन चीजों को अभी से एकत्रित करने का काम किया जाए। कई बार नागरिक ऐसी चीजों को फालतू की चीज मानकर फेंक देते हैं। नई पीढ़ी को पुरानी परंपराओं व औजारों की जानकारी देने के लिए यह संग्रहालय बहुत ही महत्वपूर्ण होगा।