पैदल चाल में हिस्सा लेते संदीप।
- फोटो : Narnol
टोक्यो ओलंपिक में 20 किलोमीटर पैदल चाल में जैसे ही संदीप पूनिया पदक की दौड़ में पिछड़ने से परिजनों सहित देशवासियों की उम्मीद टूट गई। वह प्रतियोगिता में 1 घंटा 25 मिनट 7 सेकेंड का समय लेते हुए 23वें स्थान पर रहे। हालांकि संदीप मेडल नहीं ले पाए लेकिन पिछले ओलंपिक की तुलना उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया है। संदीप के पिता प्रीतम सिंह ने कहा कि हार-जीत खेल का हिस्सा है, बेटे की हार पर मलाल है लेकिन गर्व है कि संदीप ने दूसरी बाद खेल के महाकुंभ में पहुंचकर क्षेत्र का मान बढ़ाया है। बता दें कि सुरेहती जाखल निवासी संदीप पूनिया ने दूसरी बार ओलंपिक खेलों में भाग लिया था। उनका मैच दोपहर 1 बजे से शुरू हुआ था। उस समय परिजन टीवी के सामने बैठकर उनका मैच देख रहे थे। संदीप ने शुरुआत बहुत अच्छी की थी। दस किलोमीटर दूरी तय करने तक वह दूसरे नंबर पर चल रहे थे। लेकिन धीरे-धीरे उनकी चाल धीमी पड़ र्गई। 1 घंटा 25 मिनट 7 सेकेंड का समय लेते हुए संदीप 23वें स्थान पर रहे। संदीप का पुत्र ईशांत व पुत्री सोनम सहित उपस्थित बच्चे भी मोबाइल में वीडियो बनाते रहे। इससे पहले रियो ओलंपिक में भी संदीप देश को पदक नहीं दिला पाए थे। रियो ओलंपिक में संदीप 50 किलोमीटर जबकि इस बार टोक्यो ओलंपिक में वे 20 किलोमीटर पैदल चाल में पैदल चाल में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
संदीप के पिता प्रीतम सिंह ने कहा कि संदीप ने इस प्रतियोगिता से पहले कड़ा अभ्यास किया था। उसके पदक की दौड़ में बाहर होने से निराशा जरूर हुई है लेकिन गर्व है कि उनका बेटा विश्व स्तर पर खेलों के महाकुंभ में दूसरी बाद देश का प्रतिनिधित्व किया। ओलंपिक में जाना ही बहुत बड़ी बात होती है। प्रतियोगिता के नतीजे घोषित होने के बाद संदीप की पत्नी गीता ने कहा कि उन्हें पदक जीतने की पूरी उम्मीद थी। संदीप के पदक न जीत पाने पर निराशा तो हुई है लेकिन हार व जीत खेल का हिस्सा होती हैं।