नारनौल। हाउस लिस्टिंग एवं जनगणना अभियान के तहत प्रगणक घर-घर पहुंचकर लोगों से अहम सवाल पूछ रहे हैं। इसका उद्देश्य हर परिवार और मकान का सटीक और अद्यतन डिजिटल डाटा तैयार करना है जिससे भविष्य की योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके।
वहीं, प्रगणक परिवारों से मकान की स्थिति, सुविधाएं, पेयजल, बिजली, शौचालय, ईंधन, इंटरनेट कनेक्टिविटी और वाहनों जैसी बुनियादी जानकारी जुटा रहे हैं। इसके अलावा, परिवार के सदस्यों की संख्या और अन्य विवरण भी दर्ज किए जा रहे हैं। यह पूरी प्रक्रिया राष्ट्रीय स्तर के डेटा संग्रह का हिस्सा है।
जिले में इसके लिए करीब 1708 प्रगणक लगाए गए हैं जबकि उनकी निगरानी के लिए 301 पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए हैं। प्रगणकों को निर्धारित क्षेत्रों में भेजा गया है, जहां वे प्रतिदिन घरों का सर्वे कर मोबाइल एप और डिजिटल फॉर्म के माध्यम से डाटा दर्ज कर रहे हैं।
इस कार्य में जुटे कई शिक्षकों ने बताया कि शुरुआती दिनों में प्रक्रिया को समझने में दिक्कत आई लेकिन प्रशिक्षण के बाद काम आसान लगने लगा है। कुछ शिक्षकों ने कहा कि स्कूल समय के बाद दोपहर में सर्वे करने पर पूरी जानकारी मिलना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि उस समय अधिकांश पुरुष काम पर चले जाते हैं और महिलाएं आराम कर रही होती हैं।
ऐसे में कई बार उन्हें शाम से देर रात तक घर-घर जाकर जानकारी जुटानी पड़ रही है। वहीं कुछ शिक्षकों का कहना है कि कार्य को सही तरीके से समझ लिया जाए तो यह ज्यादा कठिन नहीं है। प्रत्येक प्रगणक को औसतन 100 से 150 घरों का क्षेत्र आवंटित किया गया है। शहरी क्षेत्रों में यह संख्या अपेक्षाकृत कम और ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक रखी गई है।
जिला शिक्षा अधिकारी विश्वेश्वर कौशिक ने कहा कि यह कवायद भविष्य की सरकारी योजनाओं, बजट आवंटन, आवास, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे प्रगणकों को सही और पूरी जानकारी देकर इस राष्ट्रीय कार्य में सहयोग करें।