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छह साल बाद भी सरकार नहीं बना पाई नसीबपुर में शहीद स्मारक

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1857 की क्रांति में वीरों के खून से लाल हुई नसीबपुर धरती पर घोषणा के छह वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रदेश सरकार शहीद स्मारक नहीं बनवा पाया है। अभी तक इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन तक ट्रांसफर नहीं हो पाई है। पहले यह स्मारक पर्यटन विभाग द्वारा बनाई जानी थी लेकिन अब यह लोक संपर्क विभाग द्वारा बनाई जाएगी।
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बता दें कि 1857 की क्रांति में जिला भी पीछे नहीं था। राजा राव तुलाराम के नेतृत्व में जिले के वीरों ने नसीबपुर के मैदान में अंग्रेजों से लोहा लिया था। आजादी की इस लड़ाई में लगभग पांच हजार से अधिक वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। पूरी धरती खून से लाल हो गई थी। इसके बाद जिले के 100 से अधिक युवाओं ने सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में शामिल होकर देश की लड़ाई लड़ी। इसके अलावा चीन, पाकिस्तान व कारगिल में भी जिले के वीरों ने शहादत दी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 2016 में नसीबपुर में एक बड़ा शहीद स्मारक बनाए जाने की घोषणा की थी। यह स्मारक टूरिज्म विभाग की ओर से बनाया जाना था लेकिन छह वर्ष बीत जाने के बाद जमीन तक ट्रांसफर नहीं हो पाई। अब नसीपुर को शहर में शामिल कर दिया है और इसको बनाने का जिम्मा लोक संपर्क विभाग को दिया गया है।
चीन युद्ध से लेकर अब तक 186 वीर दे चुके शहादत
चीन युद्ध से लेकर अब तक जिले के 186 वीर देश के लिए शहादत दे चुके हैं। सैनिक बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार 1962 चीन युद्ध में 37, 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध में 34, 1971 पाकिस्तान युद्ध में 39, ऑपरेशन रक्षक में 40, कारगिल युद्ध में सात व अन्य ऑपरेशन या लड़ाई में शहीद हो चुके हैं।
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हमने रिव्यू कर केस बनाकर भेजा दिया है। हम केवल जमीन अस्थायी रूप से देंगे। केवल बनाने की अनुमति देंगे। इसकी परमिशन के लिए हमने शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक को अनुमति लेने के लिए लेटर भेजा है। -सुमन लता, ईओ, नगर परिषद, नारनौल।
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