नारनौल। कार्यकाल खत्म होने के बाद पंचायतें भंग हो गई हैं। इसके बाद से ही गांवों में सफाई व्यवस्था चरमराने लगी है। गांवों में विकास कार्य भी अटक गए हैं। कुछ निवर्तमान सरपंच गांव में चाह कर भी कार्य नहीं करवा पा रहे हैं, तो कुछ कार्यों में रुचि नहीं ले रहे हैं।
पंचायत चुनाव का मामला पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय में चल रहा है। जिस कारण अभी चुनाव होना संभव नहीं दिखाई दे रहा है। पंचायतें भंग के बाद से ही सरकार ने गांवों में सफाई व अन्य विकास कार्यों का जिम्मा ब्लॉक पंचायत अधिकारियों को सौंप दिया है। मगर अधिकारी गांवों में सफाई करवाने में विफल साबित हो रहे हैं। पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व सफाई कर्मी नियमित रूप से गांवों में सफाई करते थे। लेकिन कार्यकाल खत्म होने के बाद जैसे ही गांवों का प्रशासक बीडीपीओ को बनाया गया है, तब से सफाई कर्मी भी अपनी मनमानी करने लगे हैं। ग्रामीणों की बार-बार मांग के बावजूद भी साफ-सफाई नहीं कर रहे हैं।
गांवों में चारों ओर पसरी गंदगी, नालियां भी गंदगी से भरीं
पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के बाद से गांवों में गंदगी बढ़ने लगी है। नालियां भी सफाई के अभाव में अवरुद्ध हो गई है। निवर्तमान सरपंच चाह कर भी कार्य नहीं करवा पा रहे हैं, क्योंकि जब पंचायतें थी तो ग्रामीण सरपंच से कहकर सफाई करवा लेते थे और सफाई कर्मचारी भी सरपंच की बात मानते थे, लेकिन अब सफाई कर्मी उनकी नहीं सुनते हैं। क्योंकि उनका सीधा सा जवाब होता है कि अधिकारी ने उनकी जहां ड्यूटी लगाई है वे वहीं कार्य करेंगे। ऐसे में गांवों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। नालियां की सफाई नहीं होने से उनका गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है।
अटाली की फिरनी में जमा गंदा पानी
सीहमा के गांव अटाली की फिरनी में गंदे पानी की निकासी न होने के कारण पिछले काफी समय से घरों का गंदा पानी सड़क तथा पंचायती जमीन में एकत्रित हो रहा है। जिससे ग्रामीण बेहद परेशान हैं। ग्रामीण राम सिंह, कुलदीप सिंह, राकेश कुमार, मुकेश कुमार, अशोक कुमार, अजीत सिंह, अनूप सिंह, परमजीत सिंह, सुरेश कुमार, सुमन देवी, शांति देवी, लाली देवी, कर्मवीर सिंह, पुरुषोत्तम व विनोद कुमार कहना है कि जब से पंचायतें भंग हुई है गांव में सफाई व्यवस्था बिगड़ने लगी है। घरों से निकलने वाले गंदे पानी की निकासी न होने के कारण पानी सड़क पर इकट्ठा हो रहा है। जिससे सड़क से गुजरने वाले आमजन व वाहन चालक परेशान हो रहे हैं। ग्राम पंचायत का कार्यकाल पिछले छह महीने पहले खत्म हो चुका हैं ऐसे में उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
सीहमा खंड के गांव दुलोट जाट में भी स्वच्छता अभियान को सरेआम ठेंगा दिखाया जा रहा है। ग्रामीण चौधरी सूरजभान सिंह, चौधरी बाबूलाल, चौधरी राजेंद्र सिंह, राजेश कुमार, वेद कोर देवी, बचना देवी, राजबाला देवी, मुन्नी देवी, महिपाल शर्मा, कमलेश देवी, सभा कोर देवी, चौधरी मान सिंह ने कहा कि ग्राम पंचायत द्वारा गांव में सड़कें तो बनवा दी गई हैं लेकिन नाले की व्यवस्था नहीं है। ग्राम पंचायत द्वारा घरों से गंदे पानी की निकासी के लिए नालियों का इंतजाम न करने के कारण गंदा पानी खाली प्लॉट में इकट्ठा हो रहा है। मक्खी, मच्छर से बीमारी फैलने की आशंका है। लोग बदबू के बीच जीवन जीने को मजबूर हो रहे हैं।
वर्जन
पंचायतें भंग होने के बाद ग्राम सचिवों को गांवों की देखरेख की जिम्मेदारी दी गई है। एक ग्राम सचिव को तीन से चार गांव दिए गए हैं। वे नियमित रूप से गांवों में जाकर सफाई व्यवस्था का जायजा लेते हैं। फिर भी किसी गांव में समस्या है तो उसे दूर किया जाएगा।
- ओमप्रकाश, जिला विकास व पंचायत अधिकारी