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कोरोना संकट में बंद ग्रामीण रुटों की बसों को दोबारा से चलाने की मांग

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महेंद्रगढ़ बस स्टैंड पर बस में चढ़ते यात्री। संवाद - फोटो : Narnol
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जनवरी में कोरोना संकट के दौरान महेंद्रगढ़ से सेहलंग रूट पर चलने वाली बस को बंद कर दिया गया है। ग्रामीणों ने बस स्टैंड इंचार्ज को पत्र भेजकर बस चालू करवाने की मांग की। लॉकडाउन से पहले महेंद्रगढ़ से सेहलंग रूट पर दो बसें चार फेरे लगाती थीं, जिससे गांव माजरा, लावन, मालड़ा, मालड़ा बास, बवाना, सेहलंग, स्याणा नौताना चांगरोड़ के लोगों को फायदा होता था। एक बस 1.30 बजे महेंद्रगढ़ बस स्टैंड से चांगरोड़ तक जाती है। एक बस में इतनी अधिक भीड़ होती है कि पैर रखने को जगह भी नहीं मिलती, जिसके कारण ग्रामीणों को परेशानी होती है।
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यह थी पहले व्यवस्था
इन ग्रामीण रूटों पर पहले सुबह और शाम के समय दोनों बसें चार फेरे लगाती थीं। एक-एक बस दोपहर को 1.30 बजे महेंद्रगढ़ बस स्टैंड से चलती थीं जो लावन, मालड़ा, बवाना, सेहलंग, स्याना, नौताना होते हुए चांगरोड़ जाती थीं। 3.30 बजे यह वापस सेहलंग, बवाना, बसई, हकेंवि जाट पाली, महेंद्रगढ़ बस स्टैंड होते हुए नारनौल के लिए जाती थीं। इन बसों में दिनभर में करीब 1500 यात्री सफर करते थे, जिससे राज्य परिवहन को भी राजस्व मिलता था।
कोरोना संकट के कारण हो गई थी बस सेवा बंद
बस स्टैंड इंचार्ज वेद प्रकाश ने बताया कि महेंद्रगढ़ से सेहलंग रूट पर दोपहर के समय बस सेवा शुरू करने की मांग को लेकर ग्रामीणों द्वारा पत्र भेजा गया है। इन ग्रामीण रूटों से प्रतिदिन करीब 1500 यात्री सफर करते थे। लेकिन कोरोना संकट के दौरान जनवरी में शिक्षण संस्थाओं के बंद होने से यात्रियों की संख्या कम हो गई थी। लेकिन अब सही संख्या हो गई है। जीएम नवीन कुमार भारद्वाज से शीघ्र बस सेवा शुरू कराने की मांग की जाएगी।
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