नारनौल। ईरान-अमेरिका-इस्राइल के बीच तनाव ने छह महीने में कपास के भाव में 50 प्रतिशत का उछाल ला दिया है। छह माह पहले जो कपास 7-8 हजार रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा था, वह अब 11,500 से 12,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। यही नहीं, बिनौला भी महंगा हो गया है।
हर साल अगस्त आते-आते कपास का भाव 300 से 400 रुपये तक बढ़ता था। इस बार हालात अलग हैं। छह महीने में ही करीब 4 हजार रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आ चुकी है। कपास कारोबारी मोहित चौधरी इसकी तीन मुख्य वजहें बताते हैं। एक, पश्चिमी एशिया में तनाव से कपास का आयात नहीं हो पा रहा है।
भारत में कपास का आयात ब्राजील, अमेरिका और आस्ट्रेलिया से होता है। ब्राजील और अमेरिका से आने का रास्ता उसी होर्मुज जलडमरूमध्य से है जिस पर कब्जेदारी को लेकर अमेरिका और ईरान में ठनी हुई है। महंगाई की दूसरी वजह इस साल कपास के उत्पादन में 20 फीसदी की गिरावट भी है।
तीसरी वजह कच्चे तेल का दाम ज्यादा, आयात कम होना भी है। दाम बढ़ने से सिंथेटिक फाइबर (पॉलिएस्टर) महंगा हो गया है। यह कच्चे तेल को रिफाइन करने पर निकले रसायनों (टेरेफ्थेलिक एसिड और मोनो एथिलीन ग्लाइकॉल) से बनता है। कपास महंगा होने पर पॉलिएस्टर विकल्प बन जाता था। इस बार इसकी गुंजाइश नहीं।
बिनौला के दाम भी 900 रुपये चढ़े
कपास महंगा होते ही इसका बीज (बिनौला) भी सात माह में करीब 900 रुपये महंगा हो गया है। जनवरी 2026 में 45 किलोग्राम बिनौले के एक बैग का मूल्य 1500 से 1600 रुपये था। अब यह 2400 से 2500 रुपये तक पहुंच गया है।
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मैं कपास से रूई की गांठें बनाकर धागा फैक्टरी को भेजता हूं। कपास की पैदावार घटने से दाम बढ़ गए हैं। फायदा कम देख किसानों ने कपास उगाया ही नहीं। इस साल कपास का व्यापार भी घटना तय है। -मोहित चौधरी, कपास विक्रेता, नारनौल
बिनौला का भाव 7 माह में 900 रुपये बढ़ चुका है। इसे खिलाने से दूध में वसा की मात्रा बढ़ जाती है। घी ज्यादा बनने के कारण किसान पशुओं को इसे खूब खिलाते हैं। लेकिन, भाव बढ़ने से इसकी बिक्री घट गई है। -शेखर, बिनौला खल विक्रेता, नारनौल
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मैं हमेशा बाजरे की खेती करता था लेकिन इस बार कपास भी बोयी है। बाजार में कपास का भाव भी काफी बढ़ गया है। मुझे अच्छी पैदावार की उम्मीद है। इससे अच्छा लाभ भी होगा। -नरेंद्र कुमार, किसान, गांव डेरोली जाट
वर्जन :
तीन साल में एक तिहाई रह गया कपास का रकबा
जिले की मिट्टी कपास के कम अनुकूल है। इससे कपास की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसी कारण जिले के अधिकांश किसान कपास की खेती घटाते जा रहे हैं। यह लोग बाजरा अधिक बोने लगे हैं। इस साल करीब 12500 एकड़ में ही कपास की बोआई हुई है। वर्ष 2024 में 37000 एकड़ में बोआई हुई थी। -सतीश कुमार इंदौरा, तकनीकी सहायक, कृषि विभाग, नारनौल
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जिले में कपास की खेती और भाव
वर्ष रकबा (एकड़ में) भाव (प्रति क्विंटल)
2024 37000 8 हजार रुपये
2025 28000 8500 रुपये
2026 12500 12 हजार रुपये