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ठंड ने दिखाने शुरू किए तेवर, न्यूनतम तापमान पहुंचा 4.2 डिग्री सेल्सियस

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गत सप्ताह हुई बारिश के बाद अब ठंड का असर दिखने लगा है। वीरवार को शीतलहर चलने से लोग दिनभर ठिठुरते रहे, जिससे जनजीवन प्रभावित रहा। हालांकि कोहरा नहीं होने से लोगों ने राहत की सांस जरूर ली है। वीरवार को न्यूनतम तापमान बुधवार के 6 डिग्री के मुकाबले गिरकर 4.2 डिग्री सेल्सियस व अधिकतम तापमान 20.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
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राजकीय महाविद्यालय नारनौल के पर्यावरण क्लब के नोडल अधिकारी डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि गत दिनों में सक्रिय मौसम प्रणाली वेस्टर्न डिस्टरबेंस से पर्वतीय क्षेत्रों में भारी हिमपात होने के बाद पवनों की दिशा उत्तरी हो गई है। इन हवाओं की गति 5-10 किलोमीटर प्रति घंटा हो गई है। जिसकी वजह से मैदानी इलाकों में शीतलहर चल रही है। आने वाले दिनों में मैदानी राज्यों में काफी स्थानों पर तापमान शून्य से कम होने की संभावनाएं बन रही है। नोडल अधिकारी ने बताया कि 30 दिसंबर को उत्तर भारत के मैदानी राज्यों हरियाणा, एनसीआर दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश में लगातार तापमान में गिरावट जारी है।
राजस्थान में वीरवार को फतेहपुर सीकर का न्यूनतम तापमान 0.0 डिग्री सेल्सियस और सीकर का 1.1 डिग्री सेल्सियस और करोली का 1.5 डिग्री सेल्सियस रहा। हरियाणा में सबसे ठंडा हिसार 2.0 डिग्री सेल्सियस रहा और दूसरे स्थान पर बालसमंद का न्यूनतम तापमान 2.2 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं नारनौल का न्यूनतम तापमान 4.2 डिग्री सेल्सियस रहा और अधिकतम तापमान 20.1 डिग्री सेल्सियस रहा। बुधवार के मुकाबले वीरवार को न्यूनतम तापमान में 1.8 डिग्री सेल्सियस की गिरावट हुई है। जबकि महेंद्रगढ़ का न्यूनतम तापमान 4.5 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 19.8 डिग्री सेल्सियस रहा है। नववर्ष में कंपकंपा देने वाली ठंड का आगाज होगा। वातावरण में मौजूद नमी के बावजूद 5-10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की वजह से वीरवार सुबह नारनौल में कोहरा की मात्रा में कमी रही। आने वाले दिनों में पाला जमने की संभावनाएं अधिक बढ़ गई है। शीतलहर के चलते मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। किसान पाले और शीतलहर से फसल की सुरक्षा के लिए नर्सरी के पौधों एवं सब्जी वाली फसलों को टाट, पॉलिथीन अथवा भूसे से ढक देना चाहिए। पाला पड़ने की संभावना को देखते हुए जरूरत के हिसाब से खेत में सिंचाई करते रहे। इससे मिट्टी का तापमान कम नहीं होता है। 4 जनवरी के बाद मैदानी इलाकों में शीतलहर में गिरावट दर्ज होगी, क्योंकि वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय मौसम प्रणाली फिर से प्रभाव डालेगी। जिसकी वजह से मैदानी इलाकों में मौसम फिर से गतिशील और परिवर्तनशील होने वाला है। जिसकी वजह से मैदानी राज्यों पर एक बार फिर से बारिश की गतिविधियों की संभावना बन रही है।
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