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Mahendragarh-Narnaul News: 43 डिग्री की तपिश में बच्चों की परीक्षा

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फोटो नंबर-13प्राथमिक पाठशाला में गर्मी के अंदर बगैर पंखे बरामदे में पढ़ते बच्चे। संवाद
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नारनौल। गर्मी में तापमान 43 डिग्री के आसपास पहुंचने से आमजन के साथ स्कूली बच्चों का भी हाल बेहाल है। जहां एक ओर लोग घरों में एसी और कूलर के सहारे गर्मी से राहत पाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, कई सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र सीमित संसाधनों के बीच इस तपिश का सामना करने को मजबूर हैं।
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टीम ने सोमवार को विभिन्न स्कूलों में पड़ताल की जिसमें राजकीय प्राथमिक विद्यालय नलापुर में चार कमरों के लिए लगभग 15 पंखे लगे हैं लेकिन कुछ पंखे बिजली कनेक्शन की समस्या के कारण बंद पड़े हैं।
स्कूल प्रबंधन का कहना है कि इन्हें ठीक करवाने के लिए मैकेनिक को बोला रखा है। वहीं पानी एक दिन छोड़कर आता है। इससे टंकी का पानी गर्म हो जाता है। इस कारण बच्चों के लिए केवल तीन-चार मटकों का ही सहारा है।
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प्राथमिक पाठशाला मोहल्ला बास और मॉडल प्राथमिक पाठशाला रावका में गर्मी से बचाव के लिए ओआरएस और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था नहीं है। पीएमश्री कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में सभी कक्षाओं में पंखे लगे हैं लेकिन बिजली कटौती के दौरान हालात बिगड़ जाते हैं।
मॉडल संस्कृति स्कूल में भी पंखों और पांच वाटर कूलरों की व्यवस्था है लेकिन बिजली जाने पर यहां भी समस्या खड़ी हो जाती है। स्कूल में जनरेटर मौजूद है लेकिन लंबे समय से खराब पड़ा है और उसे चलाने के लिए तेल की व्यवस्था भी नहीं हो पाती हैं।
मोहल्ला सलामपुरा स्थित प्राथमिक पाठशाला में दो स्कूल एक ही परिसर में संचालित हो रहे हैं जहां केवल दो कमरे उपलब्ध हैं। बरामदे में बैठने वाले बच्चों को बिना पंखों के गर्म हवाओं का सामना करना पड़ता है। स्कूल की चहारदीवारी कम ऊंची होने और टीन शेड की कमी के कारण धूप और गर्मी से बचाव नहीं हो पाता। यहां पानी के लिए भी केवल एक-दो मटके ही उपलब्ध हैं।
अधिकांश स्कूलों में गर्मी से बचाव के लिए जरूरी दवाइयां और ओआरएस की व्यवस्था नहीं है। केवल मॉडल संस्कृति स्कूल को छोड़कर अन्य विद्यालयों में यह सुविधा नदारद है।
वर्जन:
जिन स्कूलों में पानी व पंखों की समस्या है वे तुरंत जानकारी हमारे पास भेजे, वैसे हमने पहले भी सभी स्कूलों से यह जानकारी मांगी है। जहां भी ऐसी कमियां है उन्हें दूर किया जाएगा। ओआरएस के लिए सभी स्कूलों को अपने फंड से इसकी पूर्ति के लिए कहा गया है। -डॉ. विश्वेश्वर कौशिक, जिला शिक्षा अधिकारी, नारनौल
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