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मौसम परिवर्तित होने से बच्चों में निर्जलीकरण बढ़ा

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नागरिक अस्पताल के वार्ड में भर्ती उल्टी-दस्त के रोगी। संवाद - फोटो : Narnol
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मौसम में तेजी से हुए बदलाव के कारण मौसमी बीमारियां शुरू हो गई हैं। बच्चे उल्टी-दस्त की चपेट में आने लगे हैं। दिन में जहां गर्मी हो रही है वहीं रात में अभी भी गर्मी और रात में सर्दी हो रही है। मौसम में इस बदलाव का असर और खानपान में मामूली सी लापरवाही से बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। उल्टी-दस्त, बुखार, खांसी जुकाम की समस्या आम हो गई है। रोजाना लगभग दो दर्जन बच्चे उल्टी-दस्त से पीड़ित हो रहे हैं। हालांकि बड़ों की ओपीडी में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं आई है, लेकिन इस बार बच्चों की ओपीडी में बढ़ोतरी हो रही है।
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बता दें कि कुछ दिनों से मौसम परिवर्तनशील है। दिन का तापमान करीब 41 डिग्री सेल्सियस तथा रात का तापमान 18 से 20 डिग्री सेल्सियस रहता है। मौसम परिवर्तन होने की वजह से बच्चे उल्टी-दस्त की चपेट में आ रहे हैं। प्रतिदिन बच्चों की ओपीडी लगभग 100 होती है, जिसमें 25 मरीज निर्जलीकरण के होते हैं। इसके अलावा बड़ों में भी निर्जलीकरण के मरीज आने शुरू हो गए हैं। अभी आठ से दस मरीज इमरजेंसी में आ रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार अगर सावधानी नहीं बरती गई तो मरीजों की संख्या बढ़ सकती है।
बच्चों में निर्जलीकरण के लक्षण
नागरिक अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश शर्मा ने बताया कि बच्चों को पेट में इंफेक्शन होने पर उल्टी, दस्त लग जाते हैं और उनका कुछ खाने-पीने का मन नहीं करता है। ऐसे में बच्चों में पानी की कमी हो सकती है। बच्चों में पानी की कमी के लक्षण कुछ इस प्रकार हैं
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कम पेशाब आना
तीन घंटे या इससे ज्यादा समय तक पेशाब न आना
रोने पर आंसू न निकलना
होंठों का फटना
मुंह में सूखापन
थकान और काम न कर पाना
सुस्ती और नींद आना
रोना या चिड़चिड़ापन
तेज सांसें आना और दिल की धड़कन तेज होना
यदि आपको ये लक्षण दिख रहे हैं तो समझ जाइए कि आपके बच्चे के शरीर में पानी की कमी हो गई है।
बच्चों में निर्जलीकरण का इलाज
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश शर्मा ने बताया कि शरीर में तरल पदार्थों की कमी को दूर करना ही निर्जलीकरण का सबसे असरकारी तरीका है। हलके निर्जलीकरण को घर पर ही ठीक किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि बच्चों को ज्यादा से ज्यादा पानी, जूस, ओआरएस, नींबू पानी पिलाया जाना चाहिए। कई बार सादा पानी पर्याप्त नहीं होता है इसलिए नमक और पानी का घोल जरूरी होता है। बाहर की वस्तुओं का खाने से परहेज करना चाहिए। यदि बच्चा मां का दूध पीता है तो इसे जारी रखें। मां के दूध से भी बच्चे में पानी की कमी को दूर किया जा सकता है।
बड़ों में भी आ रहे निर्जलीकरण के मरीज
आपातकालीन वार्ड में तैनात डॉ. अचल ने बताया कि मौसम परिवर्तन होने से निर्जलीकरण के मरीज आ रहे हैं। उन्होंने दूसरा कारण नवरात्रों में किए जा रहे व्रत को भी बताया है। उन्होंने बताया कि व्रत करने वाले श्रद्धालु पूरे दिन खाली पेट रहते हैं और पानी कम पीते हैं। ऐसे में निर्जलीकरण हो सकता है। उन्होंने बताया कि इमरजेंसी में प्रतिदिन सात-आठ मरीज आ रहे हैं, लेकिन ज्यादा दिक्कत नहीं होने पर उनको इलाज देकर छुट्टी कर दी जाती है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में गर्मी तेज पड़ेगी और लू चलेगी, जिससे मरीजों की संख्या बढ़ सकती है। ऐसे में लोगों का सावधानी बरतनी होगी।

नागरिक अस्पताल में लगी मरीजों की भीड़। संवाद- फोटो : Narnol

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